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अपने सपने छोड़ें नहीं, पूरा करें बेटियां...

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अपनी छोटी बहन सीवी और भाई मनदीप के साथ बॉक्सर स्वीटी बूरा। संवाद
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प्रदेश की बेटियां व महिलाएं मजबूत हैं। ये अपने सपने छोड़ें नहीं, पूरा करें। इसमें अड़चनें आ सकती हैं, मगर रोक नहीं सकती। शुरुआत में मेरे सामने भी अनेक मुश्किलें आई। आस पड़ोस व रिश्तेदारों ने ताने मारे। मगर घरवालों ने हमेशा सहयोग किया। मम्मी-पापा ने प्रोत्साहित ही नहीं किया, निडर बनना भी सिखाया। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना पाईं हूं। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर स्वीटी बूरा का। वे रविवार को अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के तहत बातचीत कर रही थीं। उनकी बॉक्सर बहन सीवी बूरा व भाई मनदीप बूरा भी साथ में थे।
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मूलरूप से हिसार के गांव घिराय हाल सेक्टर चार निवासी बॉक्सर स्वीटी बूरा ने कहा कि शुरू से ही उनका रहन-सहन लड़कों की तरह रहा है। घर में भी कभी बेटी या बेटे में फर्क नहीं किया गया। रिश्तेदारों ने दबाव बनाया तो मम्मी-पापा ने पक्ष लिया। धीरे-धीरे मुकाबलों में जीत के साथ पहचान बनती गई। अब सभी नाज करते हैं। मैं भी कभी किसी बात से डरी नहीं। पापा ने सिखाया कि डर कुछ नहीं है। इसलिए हमेशा निडर होकर रही हूं। अपने खेल के बूते दिल्ली आयकर विभाग में इंस्पेक्टर का पद हासिल किया है।
गांव में रहते समय पेयजल दूर से लाना पड़ता था। उस समय भारी टोकनी सिर के बजाय हाथों में लटका कर लाती थी। यहीं से हाथों की एक्सरसाइज शुरू हुई। गांव में लड़कियों के साथ कबड्डी खेली। पापा ने बीटेक करने के लिए कहा तो मैंने पढ़ने से मना करते हुए खेलने की इच्छा जाहिर की। इस पर उन्होंने एतराज न करते हुए खेल का चुनाव भी मुझ पर छोड़ दिया। मैने बॉक्सिंग चुना। अब तक इस खेल में 22 राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत चुकी हूं। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में चैंपियन रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए वर्ल्ड रैंकिंग दो हासिल की। अब मेरा सपना ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है। इसकी तैयारी शुरू कर चुकी हूं। इससे पूर्व 21 अक्तूबर से हिसार में होने वाली राष्ट्रीय चैंपियनशिप में मेडल जीतना लक्ष्य है।
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बड़ी बहन को सीवी मानती है अपना गुरु
सीवी बूरा ने अपना बॉक्सर बनने का सफर बड़ी बहन स्वीटी बूरा को देखकर शुरू किया। उनकी सफलता व खेल से प्रभावित होकर बॉक्सिंग की शुरुआत की। सीवी ने कहा कि वह बड़ी बहन को अपना गुरु मानती हैं। उन्हीं से सीखे टिप्स से ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग में पहचान बना पाई। रविवार को एमडीयू में हुई बॉक्सिंग स्पर्धा के 63 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक जीता। स्नातक के बाद एनआईएस कोर्स कर चुकी सीवी का लक्ष्य भी बॉक्सिंग में सुनहरा भविष्य बनाना है।
भाई मनदीप खेल चुका है रणजी
स्वीटी व सीवी के छोटे भाई मनदीप बूरा भी बहनों की तरह खिलाड़ी है। इन्होंने क्रिकेट में भविष्य संवारने का सपना बुना है। वे रणजी में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। हरियाणा की टीम का बतौर तेज गेंदबाज प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बल्ले से भी पांच बार अर्ध शतक बना चुके हैं। खेल जगत में अपनी विशेष पहचान बना चुके तीनों भाई-बहन दोस्त की तरह रहते हैं। शादी समारोह हो या अन्य कार्यक्रमों में भी साथ ही जाते हैं। दीपावली पर घर सजाना और मिलकर रोशनी करना पसंद है।
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