हरियाणा के रोहतक में पीजीआई को मंगलवार दोपहर बाद कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसएस लोहचब के रूप में नया निदेशक मिल गया। राज्यपाल एवं पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
निदेशक के पद पर कार्यभार संभालने के बाद डॉ. एसएस लोहचब ने इस जिम्मेदारी के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, एसीएस हेल्थ एवं कुलपति डॉ. अनीता सक्सेना का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस विश्वास से उन्हें निदेशक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, उस पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
संस्थान को ऊंचाई के नए शिखर पर ले जाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। अब तक कार्डियक सर्जरी विभागाध्यक्ष के साथ डीन एकेडमिक अफेयर पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई है। अब निदेशक के रूप में खुद को साबित करना है। पीजीआईएमएस मेरे दिल में बसा है। क्योेंकि वर्ष 1985 में पीजीआईएमएस से ही एमबीबीएस की परीक्षा पास करने के बाद वर्ष 1991 में एमएस जनरल सर्जरी की।
वर्ष 1996 में जीबी पंत अस्पताल नई दिल्ली से एमसीएच कार्डियोथोरेसिक सर्जरी की डिग्री हासिल की। यहीं से एमबीबीएस करने के बाद वर्ष 1997 में लेक्चरर पद पर कार्यभार संभाला था। इसके बाद रीडर, प्रोफेसर, सीनियर प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद पर कार्य करते हुए वर्ष 2019 में डीन एकेडमिक अफेयर पद पर पहुंचे।
इसके अलावा कार्यकारी निदेशक, चिकित्सा अधीक्षक की जिम्मेदारी भी रही है। कोविड-19 के दौरान एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी समेत अन्य पैरामेडिकल कोर्स में बच्चों के दाखिले की काउंसलिंग कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महामारी के दौरान पीजीआईएमएस में एकमो मशीन की शुरुआत की। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में सबसे पहला कार्डियक सर्जरी के ऑपरेशन किए हैं।
बधाई देने वालों का लगा तांता
पीजीआई निदेशक बनने की सूचना मिलने के बाद डॉ. एसएस लोहचब को बधाई देने वालों का तांता लग गया। विवि अधिकारियों के अलावा कैंपस के सहकर्मी चिकित्सकों, दोस्तों, रिश्तेदारों व विद्यार्थियों ने फोन करके उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दी। संस्थान के कुछ चिकित्सकों ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर उनके निदेशक बनने की खुशी साझा की।
निदेशक की दौड़ में थे कई नाम
पीजीआई निदेशक बनने की दौड़ में संस्थान से कई नाम थे। इनमें तीन महिला चिकित्सक भी शामिल रही। वरिष्ठ चिकित्सकों में भी अनुभवी, अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ, नामी व खास पहचान रखने वाले इन चिकित्सकों में पिछले करीब छह महीने से अदृश्य जोर आजमाइश चल रही थी। आखिर इसमें डॉ. एसएस लोहचब कामयाब रहे। उन्होंने अपनी नियुक्ति से सभी को चौंका दिया है।