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पहले बेटे पर भी हुई थी फायरिंग, दस दिन बाद कर दी धर्मेंद्र की हत्या

Wed, 31 Aug 2016 02:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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मृतक धर्मेंद्र की फाइल फोटो - फोटो : file photo
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आरोपियों ने काफी समय से धर्मेंद्र और उसके परिवार को निशाना बनाने की साजिश रच रची थी। आरोपियों ने करीब दस दिन पहले धर्मेंद्र के बेटे की हत्या के इरादे से उस पर फायरिंग भी की। वह महम में किसी काम से कार लेकर आया था। फायरिंग में धर्मेंद्र का बेटा बाल बाल बच गया था। मामले में महम थाने में केस भी दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद से ही धर्मेंद्र के परिवार पर खतरा मंडराने लगा था। लेकिन परिजनों को इतना अंदाजा नहीं था कि आरोपी खुलेआम स्कू ल में ही धर्मेंद्र की हत्या कर देंगे। ग्रामीणों की मानें तो ढाई साल पहले स्कूल में ही धर्मेंद्र पर हमला हुआ था और तभी से दोनोें पक्षों के बीच तनातनी चल रही थी। मंगलवार की वारदात के बाद जब पुलिस ने मृतक के परिजनों से आरोपियों के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने से ही मना कर दिया था। हालांकि बाद में परिजनों ने पुलिस को कुछ संदिग्धों के नाम बताए हैं।
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12 दिन पहले ही भराण स्कूल में ट्रांसफर होकर आई थीं नीरज देवी

वारदात में बाल बाल बची नीरज पूनिया का करीब 12 दिन पहले ही भराण स्कूल में ट्रांसफर हुआ है। परिजनों ने बताया कि इससे पहले वह मायना के सरकारी स्कूल में कार्यरत थीं। नीरज देवी स्कूल में राजनीतिक विज्ञान की अध्यापक हैं। उनके पति अमित पूनिया प्रापर्टी डीलर हैं।

स्कूल की छुटटी के इंतजार में थे बदमाश

बदमाशों ने पूरी रैकी करने के बाद ही वारदात को अंजाम दिया। पहले तो आरोपियों ने स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार किया। इसके बाद आरोपियों ने धर्मेंद्र का हाजिरी लगाने का इंतजार किया। जैसे ही धर्मेंद्र हाजिरी लगाने पहुंचे तो आरोपियों ने उन्हें निशाना बना दिया। पुलिस की मानें तो वारदात के समय कुछ आरोपी स्कूल के बाहर भी खड़े थे। ताकि बाहर से ग्रामीणोें या अन्य व्यक्ति के विरोध करने पर उनका सामना किया जा सके।
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शुक्र रहा स्टाफ बच गया- नीरज

हमारा सारा स्टाफ हाजिरी लगाने के लिए एक जगह इकट्ठा था। अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग होनी शुरू हो गई। सभी में अफरातफरी मच गई। मैंने भी भागने का प्रयास किया, लेकिन उससे पहले ही पैर में गोली लग चुकी थी। अंधाधुंध गोलियों के बीच स्टाफ ने जैसे तैसे करके अपनी जान बचाई। शुक्र रहा कि किसी अन्य सहकर्मी को गोली नहीं लगी।

पहले खरकड़ा, फिर कुलताना और अब भराण...

पिछले दिनों जिले के सांपला और महम क्षेत्र में लगातार कई वारदात होने के बाद भी पुलिस प्रशासन की नींद नहीं टूटी। क्षेत्र में पुलिस की सक्रियता नहीं होने का ही नतीजा है कि बदमाशों ने सरेआम सरकारी स्कूल के अंदर घुसकर धर्मेंद्र को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने जैसे ही शहर में क्राइम को कंट्रोल करने के लिए सक्रियता बढ़ाई तो बदमाशों ने सांपला, महम और कलानौर क्षेत्र में खुलेआम वारदात को अंजाम देना शुरू  कर दिया। महम-सांपला बदमाशों के लिए सेफ जोन बन गए हैं। पहले तो महम के गांव खरकड़ा में 13 अगस्त को आरोपियों ने सरेआम सरपंच के भाई पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी। फिर इसके विरोध में सात घंटे बाद ही गोली चलाने के एक आरोपी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस वारदात के एक दिन बाद ही 14 अगस्त की रात को गाड़ी सवार छह-सात बदमाशों ने सांपला के गांव कुलताना के सरपंच विनोद शर्मा व उनके परिवार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर कातिलाना हमला कर दिया। वारदात में सरपंच, उनकी पत्नी और बेटे को गोली लगी थी। 
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