21 दिसंबर 2022 को अदालत ने रामपाल, उसके बेटे वीरेंद्र के अलावा आरोपी मनोज, पुरुषोत्तम, विजेंद्र, सूरजमल, अनिल कुमार, जगबीर, हरजीत, हवलदार जसबीर, हवलदार बिजेंद्र, अमित, कृष्ण, बसंत, राजकुमार, प्रीतम, रामफल, राजेंद्र, जितेंद्र, रवींद्र ढाका, जगदीश, अशोक कुमार व दो अन्य को बरी कर दिया। केस में 38 लोग आरोपी बनाए गए थे। जिनमें से पांच की मौत हो गई, जबकि बाकी बरी हो गए हैं।
साल 2006 में करौंथा के सतलोक आश्रम के बाहर हिंसा हुई। सदर थाने में रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 120बी, 148, 149 व आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 79 गवाह बनाए गए। इसमें 26 स्वतंत्र गवाह थे। साथ ही पुलिस ने दो 315 बोर की रिवाल्वर, आठ 12 बोर की गन, एक एसएलएआर व एक स्टेनगन बरामद की।
गवाह यह नहीं बता सके कि किसने गोली चलाई
केस में झज्जर जिले के गांव बाघपुर निवासी 20 वर्षीय सोनू की गोली लगने से मौत हुई। यह गोली 315 बोर की रिवाल्वर से चली थी, लेकिन पुलिस अदालत में यह साबित नहीं कर सकी कि सोनू को गोली पुलिस द्वारा बरामद हथियारों में से चली है। दूसरा, गवाह यह नहीं बता सके कि किसने गोली चलाई। ऐसे साक्ष्यों के अभाव में रामपाल सहित 24 आरोपियों के बाद रामपाल के भाई महेंद्र सहित छह आरोपी और बरी हो गए हैं।