आनंद हत्याकांड -फाइल नंबर-दो
खूनी रंजिश के चलते करौरा में युवाओं की शादी के पड़ गए लाले
आसपास क्षेत्र के लोग गांव में अपनी बेटी की शादी करना नहीं समझते मुनासिब
अमर उजाला ने गांव में जाकर ग्रामीणों से जाना उनका दर्द
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कारौर गांव में कई सालों से चली आ रही रंजिश की आंच अब रिश्तों पर भी पड़ने लगी है। यहां पर आसपास क्षेत्र के गांव व शहरों के लोग अपनी बेटी की शादी करना मुनासिब नहीं समझते हैं। यहीं कारण है कि गांव में पचास से अधिक युवाओं की शादी के लाले पड़ गए है। अमर उजाला ने शनिवार को गांव में जाकर पड़ताल की तो ग्रामीणों का दर्द उभरकर सामने आ गया। हर किसी ने रंजिश के खात्मे की बात कही।
स्थान : गांव की अस्थाई पुलिस चौकी, समय-शाम 4 बजे
यहां पर पुलिसकर्मियों के अलावा गांव के कई लोग बैठे हुए हैं। रिपोर्टर व फोटोग्राफर ने अपना परिचय देने के बाद गांव में चली आ रही रंजिश के बारे में ग्रामीणों से जानकारी हासिल करनी चाही। कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव में वर्ष 2001 से चल रही रंजिश के चलते अब तक 18 हत्याएं हो चुकी है। गांव में दो परिवारों के बीच चल रही इस रंजिश का दंश पूरे गांव को भुगतने को मजबूर होना पड़ रहा है। पिछले दो साल से तो गांव में युवाओं की शादी के भी लाले पड़ गए है। पचास से अधिक युवाओं की शादी ही नहीं हो पा रही है।
स्थान : गांव का चौराहा, समय : 4:30 बजे
यहां पर कई ग्रामीण बैठे हुए हैं। रिपोर्टर व फोटोग्राफर के परिचय देने के बाद ग्रामीण खुद ही गांव में चल रही रंजिश पर बोलने लगे। कहा कि गांव में चल रही रंजिश के कारण कई परिवार बर्बाद हो चुके है। यहीं नहीं अब तो आसपास क्षेत्र के गांव व शहरों के लोगों ने गांव में बेटियों के रिश्ते करने भी बंद कर दिए है। एक बुजुर्ग ने कहा कि मेरे परिवार में दो बेटों की शादी ही नहीं हो पा रही है।
स्थान : सरपंच के मकान के पास स्थित चौराहा, समय : 5 बजे
यहां पर कई महिलाएं व पुरुष बैठे हुए थे। पूछने पर दो बुजुर्गों ने कहा कि पुलिस भी रंजिश को खत्म करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। यहीं कारण है कि गांव में लड़कों की शादी भी नहीं हो पा रही है। कई लड़के तो सरकारी नौकरी में हैं। बावजूद इसके उनकी भी शादी नहीं हो पा रही है।
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गांव से पलायन करने में ही भलाई
कई ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस प्रशासन गांव में चली आ रही रंजिश को समाप्त करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अब कई ग्रामीणों ने गांव से पलायन का मन बना लिया है।
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बीस से अधिक बार हुई पंचायत भी नहीं करा सकी दोनों परिवारों के बीच सुलह
अब ग्रामीण न पुलिस कोई भी नहीं दे रहा रंजिश के खत्म करने की तरफ कोई ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
भले ही सुरक्षा की दृष्टि से गांव में अस्थाई पुलिस चौकी खोल दी गई हो मगर कारौर गांव में वर्ष 2001 से चली आ रही रंजिश को समाप्त करने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है। गांव में दोनों परिवारों के बीच सुलह को लेकर बीस से अधिक बार पंचायत हुई। बावजूद इसके पंचायत में सुलह नहीं हो सकी। यहीं नहीं एक तो पंचायत में शामिल लोगों के साथ ही मारपीट कर दी गई। जिसके कारण अब ग्रामीण दोनों परिवारों के बीच चल रही रंजिश को समाप्त कराने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कारौर गांव में आनंद व अनिल के परिवार के बीच वर्ष 2001 से रंजिश चली आ रही है। रंजिश के कारण अब तक दोनों परिवारों के 18 लोगों की मौत हो चुकी है। बीते शुक्रवार को ही इसी रंजिश के कारण आनंद की भी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। गांव के ग्रामीणों ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच चल रही रंजिश को समाप्त करने के लिए गांव में बीस से अधिक बार पंचायत आयोजित की। पंचायत में ग्रामीणों ने भाग लिया। हालांकि एक बार सुलह भी हो गई थी। मगर फिर से दोनों परिवारों के बीच रंजिश शुरू हो गई तथा एक की हत्या कर दी गई। एक पंचायत में तो ग्रामीणों के साथ ही मारपीट कर दी गई थी। ग्रामीणों ने कहा कि इस घटना के बाद से ही ग्रामीण दोनों परिवारों के बीच चली आ रही रंजिश को समाप्त कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे। नतीजन गांव में दोनों परिवारों के बीच खूनी खेल जारी है। पुलिस प्रशासन भी खूनी खेल पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।
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पलायन कर चला गया परिवार तो बना दी अस्थाई पुलिस चौकी
गांव में सुरक्षा की दृष्टि से वर्ष 2011 में पलायन कर जा चुके ग्रामीण के घर में ही पुलिस ने अस्थाई पुलिस चौकी बना दी। ग्रामीणों ने बताया कि पलायन कर जा चुके ग्रामीण ने ही पुलिस को चौकी के लिए मकान दिया था। मगर पुलिस चौकी बनने के बाद भी गांव में चल रही रंजिश जारी है।
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पुलिस के पहरे में रहने को मजबूर कई परिवार, सुरक्षा में जाते है स्कूल, 15 कर चुके पलायन
कारौर में चल रही रंजिश के चलते कई परिवारों को मिली है सुरक्षा
हर समय बंद रहता है पीड़ित परिवारों के मकान का दरवाजा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कारौर गांव में चली आ रही रंजिश का दंश गांव के कई परिवार भुगतने को मजबूर हैं। रंजिश के परिवार के किसी न किसी सदस्य की हत्या के बाद पांच परिवारों को जहां सुरक्षा प्रदान की गई है। वहीं 15 परिवार गांव से पलायन कर दिल्ली व शाहदरा आदि स्थानों पर जा चुके है। दहशत का आलम यह है कि परिवारों के बच्चे भी सुरक्षा में स्कूल जाने को मजबूर हैं। अमर उजाला ने कई पीड़ित परिवार की वर्तमान स्थिति को जानने का प्रयास किया।
अमर उजाला टीम गांव के पूर्व सरपंच रहे राजेश प्रधान के गांव में पहुंची। राजेश प्रधान की पुत्री आरती ने बताया कि वर्ष 2000 में दीपावली के दिन उसकी मां रानी व चाची रोशनी घर के अंदर बैठी हुई थी। इसी बीच विपक्षी दर्जनभर से अधिक लोग पहुंचे तथा मां व चाची की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। बाद में मौके से फरार हो गए। इसके बाद उसके पिता राजेश को श्रीभगवान व एक अन्य की हुई हत्या के मामले में फंसा दिया। अब सुरक्षा की दृष्टि से दो सुरक्षाकर्मी परिवार को दिए हुए हैं। राजेश जेल में है। परिवार की सुरक्षा सुरक्षाकर्मी करने को मजबूर है। बताया कि बच्चे भी सुरक्षा के बीच ही स्कूल जाते हैं।
इसके अलावा अमर उजाला टीम कृष्ण फौजी के घर पर पहुंची। जहां पर उसके बेटे जय कुमार ने बताया कि वर्ष 2011 में रंजिश के चलते ही उसके पिता कृष्ण की ढाबे पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। अब परिवार जैसे तैसे कर परिवार का गुजारा कर रहा है। इस परिवार को भी एक सुरक्षाकर्मी सुरक्षा की दृष्टि से दिया गया है। इसके अलावा कुलदीप समेत पांच परिवारों को सुरक्षाकर्मी दिए गए हैं। गांव में चली आ रही रंजिश के चलते अब तक गांव के 15 से अधिक परिवारों के लोग पलायन कर दिल्ली व शाहदरा जाकर बस चुके है।
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गांवों में चली आ रही रंजिश को खत्म करेगी पुलिस
कारौर के अलावा इस्माइला व रोहतक के भी कई गांव में कई परिवारों के बीच रंजिश चली आ रही है। इस्माइला में भी चली आ रही रंजिश के चलते दोनों पक्षों के दर्जनभर से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। डीएसपी गजेंद्र का कहना है कि विभिन्न गांवों में चली आ रही रंजिश को समाप्त करने के लिए अब पुलिस ग्रामीणों के सहयोग से प्रयास करेगी। इसके लिए गांव के गण्यमान्य लोगों की बैठक लेकर दोनों पक्षों की समस्याओं का समाधान कर सुलह का प्रयास किया जाएगा।
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खिलाड़ियों, पुलिस व फौजियों के लिए जाने जाने वाले कारौर को किसकी लग गई नजर
प्रत्येक छह माह में कुश्ती, हैंडबाल प्रतियोगिता भी गांव में कराई जाती है आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
कारौर की यदि बात की जाए तो यह गांव खिलाड़ियों से लेकर पुलिस, फौजियों व सेवानिवृृत्त ग्रामीणों के लिए भी जाना जाता है। यहां पर खेल प्रतियोगिताओं के साथ साथ समय समय पर धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि पता नहीं गांव को किसकी नजर लग गई है। चली आ रही रंजिश समाप्त होने का नाम हीं नहंी ले रही है।
रोहतक से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कारौर गांव की आबादी करीब ढाई हजार है। गांव जाट बाहुल्य है। वर्तमान में गांव में चली आ रही रंजिश के लिए जाना जाता है। मगर पूर्व में गांव शांतिप्रिय गांव की श्रेणी में आता था। मगर वर्ष 2001 में किसी बात को लेकर आनंद व अनिल पक्ष के बीच रंजिश शुरु हो गई। जिसमें अब तक 18 से अधिक की मौत हो चुकी है। ग्रामीण सुनील कुमार, राजबीर सिंह, मनोहर ने बताया कि गांव को पहले धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी जाना जाता था। यहां पर रहने वाले बाबा आजाद नाथ हर माह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कराते थे। कार्यक्रम में ग्रामीण बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। यहीं नहीं गांव के जगबीर सिंह प्रसिद्ध रागिनी कलाकार रहे है। इसके अलावा गांव में समय समय पर कुश्ती से लेकर क्रिकेट, हैंडबाल प्रतियोगिता भी आयोजित कराई जाती है। खास बात यह है कि गांव में 800 से अधिक युवा दिल्ली, हरियाणा व यूपी पुलिस जबकि कई नवदीप, संदीप, राजेश आदि एयरफोर्स में शामिल होकर देश की सेवा कर रहे है। गांव के 100 से अधिक ग्रामीण शिक्षक से लेकर अन्य पदों से रिटायर्ड है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव को वर्ष 2001 से पहले शांतिप्रिय गांव की श्रेणी में डाला गया था। यहां पर मारपीट हो जाती थी तो उसे ग्रामीण मिलकर ही निपटा लेते थे। मगर अब आए दिन गांव गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजता नजर आता है।
उधर होता रहा शव का अंतिम संस्कार, इधर चलती रही हैंडबाल प्रतियोगिता
रोहतक। शनिवार को कारौर गांव में एक तरफ जहां मारे गए आनंद के शव का परिवार के लोग अंतिम संस्कार कराने में लगे थे। उसी समय गांव के स्कूल में तीसरी नेशनल स्तरीय हैंडबाल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा था। ग्रामीण व खिलाड़ी अंतिम संस्कार में जाने के बजाए हैंडबाल प्रतियोगिता में व्यस्त थे।