दीपावली की रात सेक्टर एक में आतिशबाजी का दृश्य। अमर उजाला
सड़क पर पड़ा पटाखा उठाकर जेब में डालना एक बच्चे को भारी पड़ा। यह पटाखा जेब में रखने के बाद फट गया। इससे बच्चे की कमर से नीचे का हिस्सा झुलस गया। शुक्रवार की सुबह करीब आठ बजे हुई घटना में झुलसे बच्चे को लेकर परिजन भिवानी से रोहतक ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां उसका इलाज किया जा रहा है। यह अकेला बच्चा नहीं है जो पटाखे चलाते समय घायल हुआ है। उसके जैसे करीब 60 से ज्यादा बच्चे दिवाली की रात ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इसमें किसी का हाथ जला था तो किसी का पैर या मुंह। इनमें से 11 मरीज आंखों में पटाखा लगने के कारण घायल हुए थे। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के बाद 9 को घर भेज दिया गया। जबकि दो को गंभीर हालत होने के चलते भर्ती किया गया है। इन घायलों में एक युवा भी है।
दिवाली पर हुई आतिशबाजी में 60 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए। ये हादसे किसी के हाथ में तो किसी के चेहरे के पास पटाखा फटने से हुआ है। पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में पहुंचे इन बच्चों को वहीं इलाज देकर राहत प्रदान की गई। कम चोट होने के चलते ज्यादातर को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। यहां 11 मरीज पटाखों से आंखों में चोट लगने के पहुंचे। इनमें से दो की हालत गंभीर है। इसके चलते इन्हें भर्ती कर लिया गया है। इन दोनों मरीजों में से एक युवक है। इसकी आंख में खून उतर आया है। इसलिए डॉक्टर को उसका ऑपरेशन करना पड़ेगा। जबकि दूसरे दवाओं से ठीक किया जाएगा। गनीमत रही कि कोई न तो गंभीर रूप से झुलसा है और न ही किसी की आंख गई है। त्योहार पर अनहोनी के अंदेशे के चलते पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में हर विभाग के चिकित्सक मौजूद रहे। डीएमएस डॉ. संदीप ने बताया कि दिवाली की रात व शुक्रवार को पटाखों के जलने के मामले ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। इन मरीजों को यहां बेहतर उपचार दिया गया। चिकित्सकों की उपलब्धता के चलते किसी भी मरीज को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ा। आंख में पटाखा लगने से दो गंभीर घायलों को भर्ती किया गया है। शेष को छुट्टी दे दी गई है।