खेल व खेती के लिए दुनिया में अपनी खास पहचान रखने वाला हरियाणा अब बुलेट प्रूफ गाड़ियों के लिए भी जाना जाएगा। यहां सेना व पैरामिलिट्री के जवानों के लिए पहले से ज्यादा सुरक्षित व रफ्तार वाले बुलेट प्रूफ वाहन बनाए जाएंगे। यही नहीं, टायर में गोली लगने पर भी वाहन 50 से 100 किलोमीटर तक चलाया जा सकेगा।
बुलेट प्रूफ वाहन के टायर भी खास होंगे। इनमें गोली लगने पर टायर फ्लैट होने का डर नहीं रहेगा। यह वाहन फ्लैट टायर पर भी 50 से 100 किलोमीटर दूर तक चलाया जा सकेगा। इससे वाहन व उसमें सवार लोग सुरक्षित दूसरी जगह पहुंच सकेंगे।
कंपोजिट पैनल स्टील का विकल्प है। यह पॉलीएथलीन की उच्च गुणवत्ता तकनीक है। इसमें पॉलीएथलीन मेटिरियल को तकनीकी प्रोसेस के जरिये ठोस कंपोजिट प्लेट में बदला जाता है। यह स्टील के मुकाबले काफी हलकी व मजबूत है।
मिधानी से मंगलवार शाम को ही कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट की पहली खेप रवाना हुई है। इसे खुद सीएमडी डॉ. संजय कुमार झा ने हवन व पूजन के बाद हरी झंडी दिखा कर रवाना किया है। यहां कंपनी के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
मिधानी सेना के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट व अन्य उपकरण बना रही है। आईएमटी में शुरू हुआ यह प्लांट अगले महीने से बुलेट प्रूफ वाहन भी बनाएगा। ये वाहन पहले से अधिक मजबूत, सुरक्षित व कम वजनी होंगे। कम वजन के कारण इनकी रफ्तार भी बढ़ेगी। प्लांट में वाहन की 20 प्रतिशत से अधिक रफ्तार बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके लिए तकनीकी प्रयोग भी किए जाएंगे। इन वाहनों के टायर भी विशेष होंगे। इन पर गोली का मामूली असर होगा। - डॉ. संजय कुमार झा, सीएमडी, मिधानी।