प्रदेश में विधानसभा चुनाव चेहरा नहीं, बल्कि पार्टी लड़ेगी। विधायक जिसको चुनेंगे, वह मुख्यमंत्री बनेगा। प्रदेश में मैं कांग्रेस विधायक दल का नेता हूं, जबकि सूरजभान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। यह बात हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कही। वह शुक्रवार को डी पार्क स्थित अपने आवास पर मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे।
प्रदेश के अंदर संगठनात्मक चुनाव को लेकर कार्यकर्ताओं की राय ले रहे पर्यवेक्षकों के सामने हंगामे के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि यह कोई हंगामा नहीं है, बल्कि कार्यकर्ता अपनी राय रखते हैं। रोहतक में ऐसा कुछ नहीं हुआ। सवाल उठाने वाले नेता अपनी राय पर्यवेक्षकों के सामने रखें।
उन्होंने कहा कि 10 साल में भाजपा ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसके आधार पर लोगों के सवालों का जवाब दे सकें। हिसार के जनसंवाद कार्यक्रम में एक महिला के फैक्टरी लगाने के सवाल पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का यूं टिप्पणी करना उचित नहीं है।
हुड्डा ने कहा कि सरकार ने अब तक के कार्यकाल में कोई ऐसा कार्य नहीं किया, जिसके आधार पर लोगों के बीच जाकर समर्थन मांग सके। न तो कोई आईएमटी विकसित किया और न ही विश्वविद्यालय खोला। लोग रोजगार मांग रहे हैं तो उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
चार्जशीट में भी गंभीर आरोप, मंत्री संदीप सिंह इस्तीफा दें, नहीं तो मुख्यमंत्री लें
मंत्री संदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट में गंभीर आरोप के सवाल पर हुड्डा ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में भी मंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। अब तो चार्जशीट में लगे आरोप भी सामने आ गए हैं, जो बेहद गंभीर हैं। मंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए या मुख्यमंत्री इस्तीफा ले लें।
किसानों के लिए पोर्टल बना जंजाल, देरी से किया बीमा कंपनियों को नोटिफाई
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि लंबा अरसा बीतने के बावजूद किसानों को बाढ़ के मुआवजे का इंतजार है। सरकार ने खुद 14 लाख एकड़ से ज्यादा फसल के खराबे की बात मानी, लेकिन गिने-चुने किसानों को ही नाममात्र मुआवजा मिल पाया है। किसानों का हजारों रुपये अब भी बकाया है। मुआवजा देने के बजाय सरकार ने किसानों को पोर्टल के जंजाल में उलझा रखा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सरकार का एक और गड़बड़झाला सामने आया है। इस बार जानबूझकर बीमा कंपनियों को नोटिफाई करने में देरी की गई। सरकार ने 25 जुलाई को बीमा के लिए नोटिफाई किया। इसके चलते मई, जून और जुलाई में हुए खराबे के लिए किसान क्लेम ही नहीं कर पाए।