दिल्ली रोड स्थित औघड़ पीर मठ को एक बार फिर जिला प्रशासन ने नियंत्रण में ले लिया है। एसडीएम कोर्ट के निर्देश पर शुक्रवार को पुलिस व प्रशासन की टीम ने मठ को खाली करवा लिया। मामले में सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कार्रवाई की गई। साथ ही तहसीलदार जिवेंद्र मलिक को मठ का रिसीवर नियुक्त किया गया है।
याचिकाकर्ता महंत रमेश नाथ के वकील डॉ. दीपक भारद्वाज ने बताया कि मस्तनाथ मठ के पास ही औघड़ पीर मठ है। महंत रमेश नाथ मठ का संचालन कर रहे थे। विवाद के चलते प्रशासन ने पिछले दिनों मठ को अपने नियंत्रण में लिया था। बाद में एसडीएम कोर्ट में केस चला। एसडीएम ने मठ को दूसरे पक्ष को सौंप दिया। एसडीएम कोर्ट के फैसले को महंत रमेश नाथ ने अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश राकेश सिंह की अदालत में चुनौती दी। करीब एक माह पहले कोर्ट ने एसडीएम कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया। साथ ही एसडीएम को नए सिरे से केस की सुनवाई करने व याचिकाकर्ता को पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने के निर्देश दिए। एसडीएम कोर्ट में 21 व 23 सितंबर को मामले की सुनवाई हुई। इसके बाद 30 सितंबर को बुलाया गया। मामले की सुनवाई के बाद अब एक अक्तूबर को एसडीएम कोर्ट ने तहसील को सीआरपीसी की धारा 146 के तहत मठ का रिसीवर नियुक्त कर दिया। साथ ही सीआरपीसी की धारा 145 के तहत मठ को नियंत्रण में ले लिया। तहसीलदार आईएमटी थाना पुलिस के साथ मठ में पहुंचे और मठ की कागजी कार्रवाई पूरी की।