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किसान शब्द आते ही विस व राज्यसभा के माइक हो जाते हैं बंद

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पत्रकारों को संबोधित करते राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा। अमर उजाला
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देश की आजादी के बाद पहली बड़ा आंदोलन दिल्ली की सीमा पर चल रहा है। किसान साल भर से शांतिपूर्वक आंदोलनरत हैं। यहां से 500 से ज्यादा शव आ चुके हैं। किसी छोटे धरने प्रदर्शन में चोट लगने या हादसे में घायल होने पर भी संवेदना प्रकट की जाती है। जबकि सरकार की ओर से अब तक किसी सांसद या विधायक ने आंसू पोंछना तो दूर शोक तक प्रकट नहीं किया। इन किसानों का मुद्दा जब संसद में उठाना चाहा तो सरकार ने साफ इनकार कर दिया। विधानसभा में जब कांग्रेस ने आवाज उठाई तो माइक बंद कर दिया गया। क्या देश में किसान शब्द असंसदीय हो गया है। सरकार से यह सवाल राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने किया है। वे सोमवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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सांसद ने कहा कि किसान शांतिपूर्वक विभिन्न टोल पर बैठे हैं। किसानों की पीड़ा लेकर जब संसद व विधानसभा गए तो यहां भी सुनवाई नहीं हुई। संसद में सरकार से आग्रह किया कि तीन मुद्दों पर बात रखना चाहते हैं। पहला अर्थव्यवस्था, महंगाई व बेरोजगारी, दूसरा किसान आंदोलन और किसानों की मांगें व तीसरा जासूसी प्रकरण पेगासस। सरकार ने इन तीनों मुद्दों पर बात करने से इनकार कर दिया व चौथा मुद्दा रखने की बात कही। अब महंगाई, बेरोजगारी, किसान आंदोलन व जासूसी प्रकरण पर बात नहीं होगी तो क्या मौसम पर चर्चा करते। यही नहीं, किसान शब्द बोलते ही माइक बंद कर दिए गए। यहां तक की आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के नाम तक नहीं लेने दिए गए। यहीं विधानसभा में डॉ. रघुबीर सिंह कादियान के साथ हुआ। सरकार नैतिक आधार पर सत्ता में रहने का अधिकार खो चुकी है। इसीलिए अविश्वास प्रस्ताव भी लाए। आंदोलन देश में चल रहा है। लाठियां व बल हरियाणा में ही किसानों पर प्रयोग हो रहा है। किसान की आवाज दबाने के लिए सरकार यह सब कर रही है। इसका विरोध किया जाएगा। इस मौके पर विधायक बीबी बतरा, शकुुंतला खटक, शादीलाल बतरा, आनंद सिंह दांगी, चक्रवर्ती शर्मा, बलराम दांगी समेत अन्य मौजूद रहे।
लाठीचार्ज से सरकार का किसान विरोधी चेहरा आया सामने : डॉ. कादियान
डॉ. रघुबीर सिंह कादियान ने कहा कि करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज से सरकार का किसान विरोधी चेहरा सामने से आया है। बर्बरता पूर्वक सिर में लाठी मारना सीधे-सीधे किसानों की जान लेने वाली कार्रवाई की गई। सरकारी अधिकारी का कड़ी भाषा में बोलना सरकार के संरक्षण व दिशा निर्देश के बगैर संभव नहीं है। यह गुंडागर्दी की भाषा है। वहीं किसी को मारने की बात कह सकता है। ऐसा व्यक्ति एक मिनट भी नौकरी में नहीं रहना चाहिए। सरकार इस बारे में फैसला ले। यदि ऐसा नहीं हुआ तो लोकतंत्र में सरकारें आती-जाती रहती है। सरकार आएगी और यह अधिकारी सेवानिवृत्ति भी ले गया या कब्र में भी चला गया तो निकाल कर लाएंगे। लोकतंत्र में ऐसे कड़े बोल बोलने वाले अधिकारी ने जनरल डायर को भी माफ कर दिया है। प्रशासनिक अधिकारी लोकतंत्र को लठ तंत्र न बनाएं।
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सरकार के 2500 दिन बाद प्रदेश में चरम पर है अपराध, बेरोजगारी
सांसद ने कहा कि सरकार के 2500 दिन पूरे हुए हैं। वे उपलब्धियां गिनाकर लोगों को बरगला रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि प्रदेश में अपराध व बेरोजगारी चरम पर है। प्रदेश में ही बार-बार लाठी चार्ज व अन्य कार्रवाई के जरिये किसानों को उकसाया जा रहा है। विपक्ष में होने के नाते इस प्रकरण के बारे में राज्यपाल से समय लिया है। इस बारे में उनसे मिलकर पूंजीपतियों के हाथ में सब कुछ सौंपने की साजिश रचने का पर्दाफाश किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आंदोलन भी करेंगे। देश सिविल वार की ओर जा रहा है। इसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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