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उम्र की सीमा टूटी, लेकिन आस नहीं छूटी

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कोरोना के कारण पिछले दो साल में सेना भर्ती पांचवीं बार स्थगित हो गई। इससे अभ्यर्थियों को भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई अभ्यर्थियों की उम्र की सीमा भी टूट गई या टूटने की ओर है। इसके बाद भी उनकी आस नहीं छूट रही है। उन्हें उम्मीद है कि उम्र सीमा में छूट जरूर मिलेगी। वे पूरे हौसले और दृढ़ निश्चय के साथ निरंतर अभ्यास में लगे हुए हैं।
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कोच हरेंद्र सिंह ने बताया कि सेना भर्ती स्थगित होने से पहले राजीव गांधी स्टेडियम में दोनों ट्रैक पर करीब 1000 युवा अभ्यास करते थे। इसमें से कई ऐसे हैं, जिनकी उम्र की सीमा भी टूट गई है। भर्ती स्थगित होने से उनमें मायूसी है। अब ट्रैक पर करीब 50 अभ्यर्थी इस उम्मीद से तैयारी कर रहे है कि भर्ती के दौरान उनकी उम्र में छूट जरूर मिलेगी। वहीं, कई युवाओं ने सेना भर्ती के लिए उम्मीद ही छोड़ दी है।
अभ्यर्थी बोले-सेना भर्ती स्थगित करना ठीक नहीं, मनोबल पर पड़ता है असर
कोरोना महामारी काल में चुनाव कराए जा रहे थे। इस दौरान खूब रैलियां भी हुईं, लेकिन जिन युवाओं ने सेना में सेवा करने के लिए पसीना बहाया है, उनके लिए सेना भर्ती रैली ही स्थगित कर दी गई। यह अन्याय है। इसमें सुधार लाना चाहिए।
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-विकास कुमार
पिता भी आर्मी में अपनी सेवा देने के बाद रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने ही सेना में जाने के लिए प्रेरित किया, लेकिन सेना भर्ती स्थगित होने के कारण उम्र की सीमा टूट चुकी है। इसके बाद भी अभी उम्मीद बरकरार है। शायद उम्र की सीमा में छूट मिल जाए। भर्ती स्थगित नहीं होना चाहिए।
-अमित
अगर सरकार द्वारा उम्र में छूट मिलती है तो हमारी तैयारी बेकार नहीं जाएगी। सिर्फ इसी उम्मीद से ही सुबह और शाम तैयारी कर रहे हैं। उम्र में छूट नहीं मिली तो तैयारी करने का कोई फायदा भी नहीं होगा। भर्ती प्रक्रिया स्थगित नहीं होनी चाहिए। इससे मनोबल पर असर पड़ता है।
-अनुज कुमार
पिछले कुछ समय पहले रैली भर्ती आयोजित होने की सूचना मिली थी। इस पर परिवार के लोग भी बहुत खुश हुए थे, लेकिन भर्ती स्थगित होने से परिवार में भी मायूसी छाई हुई है। भविष्य दांव पर लग गया है। बार-बार भर्ती प्रक्रिया स्थगित नहीं होनी चाहिए।
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-शंकर
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