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लखनऊ रैली में ताकत दिखाने के बाद अब कुंडली बॉर्डर पर भीड़ बढ़ाने में जुटे किसान

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कुंडली स्थित धरनास्थल पर मौजूद किसान। - फोटो : Sonipat
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बावजूद आंदोलन जारी रखने का एलान कर चुके संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने पर सभी मोर्चों पर भीड़ बढ़ाने की पहल शुरू कर दी है। सोमवार को लखनऊ की महापंचायत में ताकत दिखाने के बाद किसानों ने कुंडली बॉर्डर पर भीड़ जुटानी शुरू कर दी है। इसके लिए सोशल मीडिया पर लगातार अपील की जा रही है। तीन कृषि कानून रद्द होने की घोषणा से किसानों में एमएसपी समेत अन्य मांगों के पूरा होने की उम्मीद जगी है।
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19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में एलान किया था कि सरकार तीन कृषि कानूनों को वापस ले रही है। इसके बाद किसानों ने खुशी जताई थी, लेकिन साथ ही अपनी 6 अन्य मांगों को लेकर 21 नवंबर को प्रधानमंत्री को खुला पत्र भी लिखा था और यह मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया था। कुंडली समेत दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों को 26 नवंबर को एक साल हो रहा है, जिसके लिए किसानों ने रणनीति के साथ तैयारी शुरू कर दी है। किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि 23 नवंबर से 26 नवंबर तक सभी मोर्चों पर किसानों की भीड़ बढ़ाई जाएगी। पंजाब-हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों के किसानों को भी मोर्चों पर पहुंचने का आह्वान किया गया है। कुंडली बॉर्डर पर पंजाब व हरियाणा से अलग-अलग जत्थों में किसान पहुंचना शुरू हो गए हैं। किसानों का कहना है कि दो दिनों में सभी मोर्चों पर किसानों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। किसान यहां ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व अन्य वाहनों में पहुंच रहे हैं।
ऊनी कपड़ों के साथ राशन लेकर आने लगे किसान
एक बार फिर किसान तैयारी के साथ पहुंचने लगे हैं। आंदोलन खत्म होने की आशंकाओं को दरकिनार करते हुए किसान ऊनी कपड़ों, राशन व अन्य सभी इंतजाम के साथ पहुंच रहे हैं। सर्दी को देखते हुए ऊनी कपड़े भी किसान अपने साथ लेकर आ रहे हैं। किसानों की संख्या इसी तरह से बढ़ती रही तो दो दिन में झोपड़ियों, पंडालों की संख्या भी बढ़ सकती है।
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भीड़ जुटाने को सोशल मीडिया की भी ले रहे मदद
किसान नेता भीड़ जुटाने को सोशल मीडिया की भी मदद ले रहे हैं। वह सोशल मीडिया पर लाइव आकर किसानों को अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील कर रहे है। जिसका असर भी दिखाई देने लगा है।
जब किसान अपने घरों से चले थे तो तीन कृषि कानूनों के साथ ही एमएसपी का गारंटी कानून बनवाने, पराली विधेयक, बिजली बिल विधेयक को भी निरस्त कराने की मांगों को लेकर निकले थे। अब तक सिर्फ कानून वापसी की घोषणा हुई है। अभी किसानों ने आधी लड़ाई जीती है। सभी मांग पूरी होने के बाद ही किसान यहां से लौटेंगे।
-बलदेव सिंह सिरसा, वरिष्ठ किसान नेता
पीएम ने तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है। अभी तक कानून वापसी नहीं हुई है। इसके लिए संसद में पूरी प्रक्रिया के तहत इन्हें वापस लिया जा सकता है। इसके साथ ही अभी तक किसानों की सबसे महत्वपूर्ण मांग एमएसपी की गारंटी का कानून नहीं बना है। सभी मांग पूरी होने पर ही किसान लौटेंगे।
-कुलदीप सिंह, गांव दोदर, जिला मोगा, पंजाब
आंदोलन के दौरान हजारों किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अभी तक सरकार ने किसानों के मुकदमे रद्द करने को कोई पहल नहीं है। किसान सभी मांग पूरी करवाने के बाद भी लौटेंगे। सरकार को उनकी सभी मांगों पर गंभीरता दिखानी चाहिए।
-भगत सिंह, गांव गढ़ी, पटियाला पंजाब
सरकार ने अभी किसानों की सभी मांगें नहीं मानी है। कृषि कानूनों के अलावा भी उनकी कई मुख्य मांगे है। जिसमें एमएसपी गारंटी कानून के साथ ही पराली का विधेयक भी शामिल है। किसान अपनी ताकत फिर से सरकार को दिखाने में जुट गए हैं। बॉर्डर पर भीड़ बढ़ानी शुरू कर दी है। दो दिन में दोगुना किसान कुंडली बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। -बलवंत सिंह बहराम, महासचिव, भाकियू पंजाब
आंदोलन में हमारे 700 से अधिक किसान साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। सरकार को चाहिए कि उनके परिवार की आर्थिक मदद करने के साथ ही उनके भरण-पोषण के लिए बेहतर प्रबंध किया जाए। यदि सरकार ने उनकी बाकी मांगों को पूरा नहीं किया तो उनका तंबू यहीं जमा रहेगा। सभी मांग माने जाने के बाद ही वह लौटेंगे।
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-बख्तावर सिंह, महासचिव भारतीय किसान मंच, शादीपुर, पंजाब
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