अभिषेक को संभालते उसके दोस्त और परिजन। अमर उजाला
प्रॉपर्टी डीलर बबलू पहलवान व उसकी पत्नी बबली का अंतिम संस्कार शहर के प्राचीन शिव मंदिर की श्मशान भूमि में दोपहर तीन बजे किया गया। एक ही चिता पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। बेटे अभिषेक ने मां-बाप की चिता को मुखग्नि दी। इस दौरान वह रोते हुए बार-बार मम्मी पापा का नाम ले रहा था। चिता को मुखाग्नि देने के बाद वह बेसुध हो गया। ऐसे में उसके दोस्त उसे हॉल में ले गए और उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारे। होश में आते ही वह बार-बार मां-पापा को याद करने लग जाता। उसके दोस्त उसे बार-बार दिलासा दे रहे थे। उसके हाल को देखकर श्मशान घाट में उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गई। हर कोई अभिषेक की मासूमियत को देखकर उसके भविष्य को लेकर चिंता प्रकट कर रहे थे।
पुलिस भी रही मुस्तैद
तिहरे हत्याकांड के चलते श्मशान घाट में पुलिस के जवान भी मौजूद रहे। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस कर्मचारी पैनी नजर बनाए हुए थे। जब तक अंतिम संस्कार नहीं हुआ और अभिषेक व उसके परिवार वाले श्मशान घाट से वापस घर नहीं पहुंचे, तब तक पुलिस कर्मचारी गेट के बाहर मुस्तैदी से खड़े रहे।