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कपास की 70 प्रतिशत, बाजरा की 60 फीसदी फसल बर्बाद

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शनिवार को हुई बारिश फसलों पर कहर बनकर टूटी है। कपास की 70 प्रतिशत और बाजरा की 60 फीसदी फसल जलभराव से बर्बाद हो गई है।
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शनिवार को जिले में करीब 146 एमएम बारिश हुई थी। इसके कारण खेतों में जलभराव गया। निचले इलाकों में ज्यादा समस्या आई है। कृषि विभाग ने रोहतक, सांपला, लाखनमाजरा, कलानौर और महम ब्लॉकों में सर्वे करवाया, ताकि हकीकत की जानकारी मिल सके। कपास का सभी खंडों में सबसे ज्यादा बुरा हाल है। कपास की फसल लगभग पकने की कगार पर थी। खेत में पानी भर जाने से वह बर्बाद हो जाएगी। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार कपास की 70 फीसदी फसल खराब हो गई है। खरीफ सीजन की दूसरी महत्वपूर्ण फसल बाजरे को भी काफी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के मुताबिक बाजरे की भी करीब 60 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। धान के लिए भी इस स्थिति में पानी फायदेमंद नहीं रहा। धान की 15-20 प्रतिशत फसल खराब होने की आशंका है। यह उन इलाकों में है जहां धान की फसल पूरी तरह पानी में डूब गई है। ज्वार की भी 60-70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जबकि, मूंग की फसल पूरी तरह खत्म हो गई है। जिले में मूंग का रकबा ज्यादा नहीं है, फसल विविधिकरण योजना के तहत किसानों ने कुछ मूंग लगाई थी, वह पूरी तरह खत्म हो गई है। गन्ने को बारिश से कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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कपास की लागत ने तोड़ी कमर
कपास की फसल पर सबसे ज्यादा लागत आती है। 70 फीसदी कपास खराब होने से किसानों की कमर टूट गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ में कपास के 2100 रुपये केे बीज लगते हैं। 1250 रुपये की डीएपी, 900 रुपये की सिंगल सुपर फॉस्फेट, 300 का यूरिया, 350 का जिंक लगता है। दो बार निराई-गुड़ाई करवाने में 2400 रुपये खर्च होते हैं। दो स्प्रे में 600 रुपये का कीटनाशक आता है, 300 रुपये स्प्रे करने वाला लेता है। दो सिंचाई पर 1600 रुपये लगते हैं, अंत में दो स्प्रे पर 500 रुपये खर्च होते हैं। इस तरह एक एकड़ कपास लगाने पर 10,300 रुपये की लागत आती है। इसके बाद चुगाई का खर्च अलग होता है। कपास लगभग पकने की कगार पर थी कि बारिश हो गई।
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