रोहतक। सरकार की ओर से शुरू की गई बुढ़ापा पेंशन योजना के लिए आवेदन करने आए 400 बुजुर्गों को बुधवार सुबह तीन घंटे तक कड़कड़ाती ठंड में सिविल अस्पताल और लघु सचिवालय के बीच चक्कर काटने पड़े। इसकी वजह थी प्रशासनिक अव्यवस्था। असल में, समाज कल्याण विभाग को अंदाजा ही नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में जिले भर से बुजुर्ग बुढ़ापा पेंशन के लिए आवेदन करने आएंगे। इसके चलते सिविल अस्पताल में सारे इंतजाम ध्वस्त हो गए, जिसकी जिम्मेदारी न तो सिविल सर्जन ने ली न ही समाज कल्याण विभाग ने। सिविल सर्जन का कहना है कि बुढ़ापा पेंशन की पूरी प्रक्रिया में उनका काम महज जांच कर उम्र प्रमाणपत्र देना है, जबकि समाज कल्याण सहायक अधिकारी ने बुजुर्गों को हुई परेशानी पर कहा कि बुजुर्गों की संख्या अधिक हो जाने की वजह से दिक्कत पेश आई।
बुढ़ापा पेंशन के लिए उम्र प्रमाण पत्र देने के लिए बुधवार को तीसरा कैंप लगाया गया था। इससे पहले लगे दोनों कैंप सिविल अस्पताल में ही लगे थे। बुधवार सुबह बुजुर्ग पहले लघु सचिवालय पहुंचे और पूर्व की तरह उन्हें आवेदन फॉर्म लेकर सिविल अस्पताल भेज दिया गया, लेकिन सिविल अस्पताल और समाज कल्याण विभाग को यह अंदाजा नहीं कि 400 बुजुर्ग आ जाएंगे, क्योंकि इससे पहले के कैंपों में बुजुर्गों की संख्या आधी रही है। नतीजा सिविल अस्पताल में भीड़ बहुत ज्यादा हो गई और मरीजों व बुढ़ापा पेंशन के लिए आए बुजुर्गों के बीच सामंजस्य बैठाना मुश्किल हो गया। इस पर समाज कल्याण विभाग ने उम्र प्रमाणपत्र बनाने के कैंप की जगह बदलने का फैसला लिया और इस काम को कर रहे दो डॉक्टरों को लघु सचिवालय में शिफ्ट कर दिया गया। सुबह आठ बजे आए बुजुर्गों का उम्र प्रमाण पत्र सुबह 11 बजे बनना शुरू हो सका।
बोले सिविल सर्जन
पेंशन बनवाने की जिम्मेदारी समाज कल्याण की, हमारी जिम्मेदारी डॉक्टर उपलब्ध कराना : डॉ. अनिल बिरला
सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने बताया कि बुजुर्गों की पेंशन बनवाने की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग की है। विभाग ही तय करता है कि कैंप कहां लगना है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी डॉक्टर उपलब्ध कराना और जांच के बाद प्रमाण पत्र देना है। फॉर्म भरवाने का कार्य समाज कल्याण का है डॉक्टर का कार्य उम्र की जांच करना है। जिला अस्पताल बुजुर्गों को क्यों भेजा गया, इस संबंध में वही बता सकते हैं जिन्होंने भेजा था। स्वास्थ्य विभाग क्रॉनिक व दिव्यांगता का सर्टिफिकेट देता है, इसके लिए पोली क्लीनिक सेक्टर तीन जगह तय की गई है।
बोले समाज कल्याण अधिकारी
आवेदकों की संख्या ज्यादा होने पर डॉक्टरों को लघु सचिवालय शिफ्ट करना पड़ा : राजेश मलिक
सहायक समाज कल्याण अधिकारी राजेश मलिक ने बताया कि पिछले दो कैंप में आने वाले बुजुर्गों की संख्या कम थी, लेकिन बुधवार को अधिक संख्या में बुजुर्ग आ गए और सिविल अस्पताल में ओपीडी के मरीजों की संख्या भी थी। जिस पर उम्र प्रमाणपत्र बना रहे डॉक्टरों को लघु सचिवालय शिफ्ट किया गया, ताकि सभी आवेदन लिए जा सकें। बुधवार को 400 बुजुर्गों ने आवेदन किया।
सामान्य से चार डिग्री कम तापमान में परेशान हुए बुजुर्ग
बुधवार को रोहतक का अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री कम दर्ज किया गया। जिले का न्यूनतम तापमान अब तक सबसे कम 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बोले बुजुर्ग
सुबह आठ बजे आ गए थे। पहले लघु सचिवालय गए और फिर सिविल अस्पताल आए और फिर से लघु सचिवालय भेज दिया गया। सुबह से परेशान हैं, प्रमाण पत्र के लिए धक्के खा रहे हैं।
- गोवर्द्धन, कहानौर, 66 वर्ष
---------
पत्नी शकुंतला 68 वर्ष की है, उसकी बुढ़ापा पेंशन के लिए आवेदन करने आए थे, लेकिन यहां सिर्फ चक्कर कटवाए गए। प्रमाण पत्र कहां बनेगा, यह ही तय नहीं हो सका। ठंड में बार-बार इधर से उधर जाने में दिक्कत हुई।
-महेंद्र सिंह, कलानौर
पहले अस्पताल में धक्के खाए, तीन घंटे वहां इंतजार किया और उसके बाद अचानक कह दिया गया कि लघु सचिवालय में डॉक्टर बैठे हैं। जब लघु सचिवालय में ही प्रमाणपत्र बनना था कि सिविल अस्पताल क्यों भेजा गया।
-गोवर्द्धन मकड़ौली कला, 68 वर्ष
पेंशन के कागजों में नाम गलत हो गया था, वो बदलवाने आए हैं, सुबह से आए हैं, लेकिन यहां से वहां भेज रहे हैं।
-रघुबीर, मदीना, 63 वर्ष