पीएससी की परीक्षा में हरियाणा के रेवाड़ी की बहू उषा यादव का चयन हुआ है। वे लंबे समय से इस उपलब्धि की बाट जोह रही थी। 2014 से उनकी यह दौड़ जारी थी। 2020 में इस परीक्षा के साक्षात्कार में वह चूक गईं मगर 2021 में उन्होंने अपनी यह मंजिल हासिल कर ली। यूपीएससी के परिणाम में उनका 345वां स्थान आया है जिसके बाद उनके ससुराल और मायका पक्ष में खुशी की लहर दौड़ गई है।
नगर के सेक्टर 3 निवासी जोगेंद्र सिंह यादव जो शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त रसायन शास्त्र प्राध्यापक एवं हरियाणा स्कूल लेक्चरर्ज एसोसिएशन (हसला) के पूर्व जिला प्रधान हैं की पुत्रवधू उषा यादव यूपीएससी की परीक्षा में 345वां स्थान हासिल करने में कामयाब रही हैं। ऐसा करके उन्होंने जिले और प्रदेश का रोशन किया है।
उषा के ससुर जोगेंद्र यादव बताते हैं कि उनकी पुत्रवधू उषा यादव और बेटे रवि यादव ने एनआईटी मुरथल से कंप्यूटर विज्ञान में उत्कृष्टता के साथ बी टेक किया। फिर दोनों की नौकरी लग गई मगर उषा सिविल सेवा में जाने की तैयारी करती रही।
उनकी सास इंदिरा देवी कहती हैं कि बहू उषा यादव की गोद में जब पोता स्वातिक आया, उसके बाद से दादा दादी पोते के साथ व्यस्त हो गए। बहू की अपनी तैयारी जारी रही। रसोई के काम में प्राध्यापक जोगेंद्र सिंह ने भी हाथ बंटाया और अब परिणाम सबके सामने है।
बता दें, उषा जिला महेंद्रगढ़ के गांव भाखरी की बेटी हैं। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली उषा की मां सुमित्रा देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जबकि पिता इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह यादव बीएसएफ से एक साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। उषा के दो भाई परमजीत यादव और योगेश यादव भी यूपीएससी की तैयारी में जुटे हैं। यह परिणाम आने के बाद उनके सेक्टर-3 निवास पर लगातार बधाई देने वाले पहुंच रहे हैं। सास इंदिरा यादव ने सबको मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार कर रही हैं।
इनको दिया श्रेय
यह परिणाम सार्वजनिक होने के बाद उषा यादव ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता पिता, सास ससुर, पति, तीन साल के बेटे, परिजनों और गुरुजन को दिया। उनके अनुसार वर्ष 2020 में भी उन्होंने यूपीएससी की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी मगर साक्षात्कार में सफल नहीं हो पाईं। वर्ष 2019 में यूपीएससी परीक्षा में गांव भाखरी के अभिषेक यादव, जो उनके परिवार में चचेरे भाई हैं का उन्हें बहु आयामी मार्गदर्शन और प्रोत्साहन किया। उनकी सास इंदिरा यादव ने उनके छोटे बच्चे स्वातिक को एक माह सच्चा दुलार दिया, जिसके चलते वे इस परीक्षा की तैयारी पूर्ण कर पाई। उन्हें विश्वास है कि वे इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद आईएएस या आईपीएस जरूर बनेंगी।
उषा ने कहा कि आईएएस और आईपीएस दोनों के कार्य क्षेत्र अलग अलग होते हैं। अगर वे आईएएस बनती हैं तो उनका मुख्य फोकस शिक्षा, पर्यावरण और शहरों में ठोस कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाएंगे। मगर आईपीएस बनने पर वे समाज से अपराध और दंगा फैलाने वालों के साथ सख्ती से निपटेंगी।