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Rewari News: फैक्टरियों से बिना ट्रीटमेंट निकलने वाला पानी बना रहा पानी को जहरीला

Fri, 03 Mar 2023 10:23 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
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रेवाड़ी। बावल व धारूहेड़ा में फैक्टरियों से बिना ट्रीटमेंट निकलने वाला पानी भूजल को जहरीला बना रहा है। फैक्टरियों से निकलते समय गंदे पानी के तालाबों से उठने वाली दुर्गंध इस बात की गवाह है कि जमीन के नीचे का पानी किस हद तक दूषित हो चुका है। औद्योगिक क्षेत्र से पानी की निकासी की समस्या अब एक विकराल रूप ले चुकी है। जगह-जगह प्रदूषित पानी भरा रहता है। गंदा पानी रिस कर भूमि के जल को प्रदूषित कर रहा है, जिससे कभी भी बीमारियां फैलने की आशंका है।
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जिला के बावल औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से निकलने वाला दूषित पानी आसपास बसे गांवों के ग्रामीणों के लिए आफत बना हुआ है। आसलवास, पातुहेड़ा, ड्योढ़ई व बगथला आदि गांवों की करीब 50 एकड़ जमीन एवं धारूहेड़ा क्षेत्र की करीब 25 एकड़ भूमि इस केमिकल युक्त पानी से खराब हो रही है। गांवों के चारो तरफ दूषित पानी भरा रहता है, जिससे बच्चों को स्कूल व मंदिर में जाने के लिए काफी दिक्कत उठानी पड़ती है। इससे एक ओर जलस्तर ऊपर हो रहा है, लेकिन यह पानी दूषित होने के कारण पैदावार पर भी बहुत फर्क पड़ रहा है। उधर, एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही औद्योगिक क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या को जड़ से ही खत्म कर दिया जाएगा।
बावल व धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी करीब 1000 फैक्टरियां हैं। नियमानुसार फैक्टरियों का गंदा पानी ट्रीटमेंट के बिना बाहर नहीं जाना चाहिए। लेकिन कई फैक्टरी संचालक नियमों को ताक पर रखकर यह पानी बाहर छोड़ रहे हैं। इससे आसपास के क्षेत्र में नुकसान हो रहा है। आसलवास के ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव के कई लोगों के मवेशी फैक्टरियों से निकलने वाले दूषित पानी को पीने से मर चुके हैं। कई बार मांग करने के बाद भी सरकार ने इन्हें कोई मुआवजा तक नहीं दिया।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के बाद भी नहीं बदले हालात
बावल औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी को ठीक करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा चुका है। इसके बाद भी चोरी-छुपे कुछ इकाइयों द्वारा दूषित पानी को खुले में छोड़ा जा रहा है। शुरुआती दौर में इस क्षेत्र की फैक्टरियों से निकलने वाला पानी बहुत कम था। अब इसकी मात्रा बढ़ गई है। जबकि धारूहेड़ा के हालात तो इससे भी बदतर हैं। यहां न तो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है और न ही दूषित पानी के निस्तारण का स्थायी समाधान किया गया है।

फैक्टरियों से निकलने वाले दूषित पानी से ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दूषित पानी व प्रदूषण से लोगों का जीना दूभर हो रहा है। जमीन देने के बाद भी युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। इसका समाधान होना चाहिए।
- हवासिंह, सरपंच

फैक्टरियों के दूषित पानी से ग्रामीण एवं मवेशी दोनों को नुकसान हो रहा है। भूमि का सारा पानी खारा हो गया है। ट्यूबवेल में भी खारा पानी आने लगा है। मजबूरी में ग्रामीणों को पीने के लिए महंगे दाम में पानी खरीदना पड़ रहा है।
- चरणसिंह, आसलवास

फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी से भूमिगत जलस्तर खराब हो रहा है। कई बार संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया जा चुका है, लेकिन हालात ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
-रामकिशन, ड्योढई
लंबे समय से कंपनियों का दूषित पानी खुले में छोड़ा जा रहा है। निगम की ओर से एसटीपी प्लांट भी बना दिया गया है। उसके बाद भी दूषित पानी छोड़ा जा रहा हे, जिससे समीप लगते खेत खराब हो रहे हैं।
-खुशीराम, ड्योढई
वर्जन
बावल में तो एसटीपी प्लांट बनाया जा चुका है। धारूहेड़ा के लिए बात चल रही है। जल्द ही इसके भी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इसके साथ ही किसी भी इकाई से दूषित पानी बाहर नहीं छोड़ा जा रहा है। फिर भी अगर कोई ऐसा करता है तो उसकी जांच करा ली जाएगी। जल्द ही बावल औद्योगिक क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या को बिल्कुल खत्म कर दिया जाएगा।
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- राजीव गोयल, वरिष्ठ प्रबंधक एचएसआईआईडीसी, बावल
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