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संसद में कृषि कानून रद्द न होने तक जारी रहेगा धरना

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गंगायचा टोल प्लाजा पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाते किसान। संवाद - फोटो : Rewari
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी। लेकिन किसान अपनी बाकी मांगों को लेकर अभी भी धरने पर बैठे हैं।
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किसानों का कहना है कि संसद में जब तक कृषि कानून वापस लेने का बिल नहीं पारित हो जाता है, तब तक धरना जारी रहेगा। रेवाड़ी में जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर पर गत वर्ष 9 दिसंबर से किसान धरने पर बैठे हुए हैं। वहीं संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से 27 सितंबर 2021 से गंगायचा टोल बंद कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री के कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले की सराहना करते हुए धरने पर बैठे किसानों ने लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की। उन्होेंने इसे आंशिक जीत बताई है। उनका कहना है कि जब तक दिल्ली में प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तब तक धरना जारी रहेगा। उनका कहना है कि हम उस दिन का इंतजार करेंगे जब कृषि कानूनों को संसद में रद्द किया जाएगा। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ किसानों के दूसरे मुद्दों पर भी बातचीत करे। अभी तक सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई बात नहीं की है, जो हमारी प्रमुख मांगों में एक है। इसी तरह आंदोलन के दौरान हरियाणा में 48 हजार से ज्यादा किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे को लेकर भी कोई बात नहीं कही गई है। न ही बिजली बिल को लेकर कोई बयान आया है। इसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। कृषि कानून रद्द करने संबंधी बिल संसद में पास होने तक इंतजार भी करना पड़ सकता है। बैठक में ही आंदोलन को लेकर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
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यह हमारी बहुत बड़ी जीत है। लेकिन अभी भी एमएसपी, शहीद किसानों की कोई बात नहीं हुई है। वहीं आंदोलन के दौरान एफआईआर, जेल जाने वालों को लेकर कोई बात नहीं की गई है। मुकदमा वापस लेने पर सरकार ने कोई बात नहीं की है। सरकार किसानों की बाकी मांगों को जब तक पूरी नहीं करेगी आंदोलन जारी रहेगा। -सतीश कुमार कामरेड, किसान नेता।
केंद्र सरकार का यह फैसला उत्तर प्रदेश व पंजाब के चुनाव को देखते हुए एक तरह से राजनीतिक फैसला लग रहा है। हालांकि आंदोलन के लेकर अंतिम निर्णय मोर्चा को लेना है। बैठक में समग्र रूप से सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद जो भी निर्णय लिया जाएगा, उस पर सभी लोग अमल करेंगे। -प्रेमरम, किसान नेता।
नरेंद्र मोदी द्वारा कृषि कानूनों को वापस लेने पर उनका धन्यवाद करता हूं। यह निर्णय बहुत पहले लिया जाना चाहिए था। अगर कृषि कानूनों को पहले वापस ले लिया गया होता तो 700 किसानों को शहादत नहीं देनी पड़ती। अब सरकार को जल्द संसद सत्र बुलाकर इन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का प्रस्ताव पारित करना चाहिए। जब तक संसद से बिल वापसी नहीं होगी, तब तक उनकी घर वापसी नहीं होगी। -ईश्वर सिंह, जिला उपाध्यक्ष चढ़ूनी।
कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक जीत पर देश के अन्नदाताओं को बधाई देता हूं । यह जीत उन लाखों किसानों की है जो पिछले एक वर्ष से हर राज्य में किसान आंदोलन का हिस्सा रहे हैं। यह जीत उन 700 से अधिक किसानों की है जो इस संघर्ष में शहीद हुए हैं। सभी बाधाओं के खिलाफ किसानों की जीत लोक संघर्ष की ताकत का परिणाम है, जिसके खिलाफ आज भाजपा सरकार को झुकना पड़ा है। -जोगिंद्र टाइगर, गंगायचा टोल अध्यक्ष।
यह जीत अभी अधूरी है। किसानों की अभी काफी मांगें लंबित हैं। तीन कृषि बिलों की वापसी में 700 से ज्यादा किसान शहीद हुए हैं। इस आंदोलन में शहीद हुए किसान परिवारों को प्रायश्चित स्वरूप मुआवजा भी दिया जाना चाहिए। मरने वाले किसानों को शहीद का दर्जा मिले और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। -राजेंद्र सिंह, संयुक्त किसान मोर्चा अध्यक्ष।
पिछले एक वर्ष से किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। यह जीत किसानों के संघर्ष की है। अभी यह जीत अधूरी है। सरकार ने अभी तक एमएसपी को लेकर कोई बात नहीं की है। जब तक किसानों की सभी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा आंदोलन जारी रहेगा। -नवीन, किसान नेता।

जयसिंहपुर खेड़ा बॉर्डर पर पटाखे जलाकर खुशी मनाते किसान। संवाद- फोटो : Rewari

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