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कचरे के ढेर से हो रही दुर्गंध से रामसिंहपुरा के लोग परेशान

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रेवाड़ी। जिले में कई वर्ष से ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने की कार्य योजना तैयार की गई थी, लेकिन यह योजना आज तक परवान नहीं चढ़ पाई है। रामसिंहपुरा में खुले में कचरा डालने पर कई बार विवाद भी हो चुका है। कचरे की री-साइक्लिंग नहीं होने के कारण इसके ढेर बढ़ते ही जा रहे हैं। इससे आसपास दुर्गंध और संक्रामक रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। वहीं, हर साल ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र नहीं होने के कारण रैंकिंग में भी स्वच्छता सर्वेक्षण में जिला पिछड़ रहा है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय से मंजूरी मिलने यहां पर प्लांट का काम शुरू हो जाएगा
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एक अनुमान के मुताबिक रेवाड़ी शहर से हर रोज 65 टन तथा बावल व धारूहेड़ा क्षेत्र से 35 टन के करीब कचरा निकलता है। स्थानीय लोगोें का कहना है कि नगर परिषद की ओर से कचरे का उठान हर रोज कराया जाता है, लेकिन इसके निस्तारण की उचित व्यवस्था आज तक भी नहीं बन पाई हैं। रामसिंहपुरा में नगर परिषद को वर्षों की मशक्कत के बाद करीब 14 एकड़ जमीन तो मिल गई है, लेकिन इस पर लगने वाले ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र की फाइल आज तक भी आगे नहीं बढ़ पाई है। स्थानीय विभाग के अधिकारी इस फाइल पर कुंडली मारे बैठे हैं, जिसका खामियाजा जिलावासियों को उठाना पड़ रहा है।
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रामसिंहपुरा में करीब पांच एकड़ जमीन पर लगाया जाना है संयंत्र
रामसिंहपुरा में करीब 5 एकड़ जमीन पर क्लस्टर स्तरीय ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाया जाना है। इसका प्रोजेक्ट भी बनाकर भेजा जा चुका है। यह संयंत्र लग जाता है तो ने सिर्फ रेवाड़ी बावल धारूहेड़ा निकाय क्षेत्र का कचरा यहां री-साइकिल होगा। वहीं नांगल चौधरी, कनीना, अटेली मंडी, महेंद्रगढ़ के निकाय क्षेत्र के कचरे का भी उचित तरीके से निस्तारण हो सकेगा। करीब 3 वर्ष पूर्व 72. 65 करोड़ की लागत का प्रोजेक्ट बनाया गया था, लेकिन अब इसकी लागत और भी बढ़ सकती हैं।
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एरोबिक कंपोस्ट प्लांट भी नहीं लगा
लॉकडाउन से पहले नगर परिषद की ओर से गीले कचरे के निस्तारण के लिए एरोबिक कंपोस्ट प्लांट लगाने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इस प्लांट के लगने से गीले कचरे से खाद बनाई जाएगी, जिसका इस्तेमाल खेती-बाड़ी में हो सकेगा। करीब 50 प्रतिशत कचरा गीला ही होता है। इसके अतिरिक्त सूखे कचरे को भी री-साइकिल करने के लिए तैयारी की जा रही हैं।
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ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने की फाइल मुख्यालय में भेजी दी गई है। सरकार के स्तर पर मामले में निर्णय होना है। जैसे ही मंजूरी मिलेगी यहां पर प्लांट का काम शुरू हो जाएगा। सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- पूनम यादव, नगर परिषद चेयरपर्सन।
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फोटो संख्या: 25
ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र अभी तक न बन पाने का खामियाजा शहर को ही उठाना पड़ रहा है। शहर में तमाम गलियों से कचरा उठने के बाद शहर के ही दर्जन भर से ज्यादा मोहल्लों में बने डंपिंग प्वाइंट में डाल दिया जाता है। यहां से काफी समय बाद कूड़ा दोबारा उठा बाहर डाला जाता है। लेकिन इस बीच कचरे की दुर्गंध से आसपास का माहौल पूरी तरह दुर्गंधयुक्त हो जाता है। इसके अलावा मक्खी-मच्छर पनपने के चलते बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
-रजवंत डहीनवाल, इनेलो प्रदेश प्रवक्ता
शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। कूड़ा निस्तारण की उचिव व्यवस्था नहीं होने के कारण रेवाड़ी की स्वच्छता रैंकिंग में भी गिरावट आई है। रामसिंहपुरा में कचरे के बड़े-बड़े ढेर होने के कारण आसपास के लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार को जल्द ही इसका काम शुरू कराना चाहिए।
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-सुरेश राव, आम आदमी पार्टी।
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