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डीएपी के लिए दुखी किसानों का बादल बढ़ाते रहे दर्द

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रविवार शाम को आसमान में छाये काले बादल। संवाद - फोटो : Rewari
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एक तरफ डीएपी नहीं मिलने से किसान दुखी हैं तो दूसरी तरफ रविवार को आसमान में छाये बादल उनका दर्द बढ़ाते रहे। पश्चिम विक्षोभ के कारण क्षेत्र में एक बार फिर से घने बादल छाते ही किसानों कि दिलों कि धड़कने बढ़ गई हैं। शनिवार दोपहर बाद से ही धीमी-धीमी चल रही पुरवा हवाओं के बाद रात में घने बादल छा गए। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई।
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एक एकड़ पर सात से आठ हजार आया खर्चा
किसानों ने कहा कि डीजल और बिजली के महंगे होने से खेती की लागत पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक बढ़ गई है। गत वर्ष पांच से छह हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च आया था। इसके साथ-साथ सरसों का बीज जो गत वर्ष छह सौ रुपये प्रति किलो मिल रहा था वह अब नौ सो रुपये किलो में खरीदना पड़ा । अब लगभग 70 प्रतिशत किसानों ने क्षेत्र में सरसों कि बिजाई कर दी है और वह अंकुरित भी हो गई है। अगर ऐसे में बूंदाबादी हुई तो सरसों सही तरीके से नहीं उगेगी। अगर बारिश हो गई तो ज्यादा नुकसान होगा और उनको दोबारा से सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इस विषय में किसान सोमबीर, संतरे, फूल सिंह, रोहतास, विजय, कृष्ण कुमार, अमित व अन्य कहा कि अगर अब बारिश होती है तो किसान इतना कर्जदार हो जाएगा कि वह पांच साल भी इससे निजात नहीं पा सकेगा।
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