संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। पिछले दिनों हुई बारिश के चलते राजकीय प्राथमिक पाठशाला हांसाका पानी से घिर गया है। बच्चों को परिसर में घुटने भर पानी से होकर कक्षाओं में जाना पड़ रहा है। जलभराव से बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य खतरे में हैं। इसके चलते कई बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों और स्कूल स्टाफ ने बताया कि तीन-चार दिन पहले गांव के सरपंच ने एक इंजन लगवाकर पानी निकाला था लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई। इंजन हटते ही बारिश होने से फिर जलभराव हो गया। जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से बारिश होने के बाद स्कूल परिसर में पानी भर जाता है।
स्थिति यह है कि हालत यह है कि बच्चों को जूते हाथ में लेकर, पैंट ऊपर मोड़कर पानी में से होकर आना-जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वे तत्काल प्रभाव से स्कूल परिसर की सफाई कराएं। जलनिकासी की व्यवस्था की जाए और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
बच्चों के माता-पिता और अभिभावक इस हालात से काफी नाराज हैं। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। स्कूल में छोटे बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें कीचड़ भरे परिसर से गुजरना खतरनाक हो सकता है। उन्हें संक्रमण, मच्छरजनित बीमारियों और फिसलने से चोट लगने का डर लगातार सता रहा है।
गांववासियों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। स्कूल परिसर में पानी भर जाता है। लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक नाली निर्माण या जल निकासी जैसी कोई स्थायी योजना नहीं बनाई गई है। सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का यह एक और उदाहरण बन गया है।
स्कूल में कार्यरत शिक्षकों ने बताया कि वे रोजाना बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल के अंदर लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और पानी की निकासी न होने के कारण उनकी भी कोई नहीं सुनता। पढ़ाई की गुणवत्ता क्या होगी जब बच्चे ही सुरक्षित नहीं हैं।
इस पानी भरे माहौल का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई अभिभावकों ने तो अपने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।