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बारिश ने सरसों की बुआई पर फेरा पानी

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ट्रैक्टर से बुआई करता किसान। संवाद - फोटो : Rewari
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आफत किसानों का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही है। खरीफ की फसल गंवा चुके किसानों पर रविवार को हुई बारिश ने दोहरी मार डाल दी है। बोई गई सरसों की फसल को उगने से पहले ही बारिश के पानी ने बर्बाद कर दिया। अब किसानों को दोबारा से सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। इससे किसानों के चेहरे पर मायूसी साफ देखी जा सकती है।
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बता दें कि गत दिनों भारी बारिश के कारण किसानों की बाजरे तथा कपास की फसलें बर्बाद हो गई थीं। इससे उत्पादन और फसल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। गुणवत्ता खराब होने पर बाजरे को किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ रहा है। जबकि बाजरे का एमएसपी 2250 रुपये प्रति क्विंटल था। कपास की गुणवत्ता भी खराब होने के कारण उसे भी औने-पौन दाम पर बेचना पड़ा है। ज्यादा बारिश होने से किसानों की कपास उत्पादन क्षमता में भी गिरावट आई है।
खरीफ की फसल के नुकसान से किसान उबरे भी नहीं थे कि रविवार को हुई बारिश ने सरसों उत्पादकों को निराश कर दिया। दाम बढ़ने के कारण इस बार किसानों ने सरसों की की बिजाई की तरफ रुख किया है। जिले में पिछले साल 70 हजार हेक्टेयर भूमि में सरसों की बिजाई की गई थी, वहीं इस बार लगभग 30 हजार हेक्टेयर में बिजाई कर चुके हैं। वहीं बारिश ने पिछले सप्ताह बिजी गई सरसों की फसल को खराब कर दिया है। अब किसानों को दोबारा सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। किसानों की माने तो एक एकड़ भूमि में 900 रुपये का सरसों का बीज, 1400-1500 रुपये की डीएपी तथा तीन से चार हजार रुपये की जुताई का खर्च आता है।
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किसानों का कहना है कि दोबारा बुआई के लिए धन का इंतजाम करना उनके सामने चुनौती बनकर खड़ी है। कई एकड़ में तीन-चार दिन पहले सरसों बोई थी, लेकिन बारिश ने पूरी बुआई को खत्म दिया। दोबारा बीज-खाद की कैसे व्यवस्था होगी।
पहले बारिश के कारण बाजरा व कपास खराब हुई। अब बोई गई सरसों खत्म हो गई। कहां तक खेती में पैसे लगाएं। एक एकड़ सरसों की बिजाई करने पर 5 से 6 हजार रुपये की लागत आती है। अब दोबारा से सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। सोहनलाल, किसान, कारोली।
बारिश ने किसानों की मेहनत पर एक बार फिर से पानी फेर दिया है। किसानों को दोबारा लागत लगाकर सरसों की बिजाई करनी पड़ेगी। वहीं बारिश के कारण बाजरे व कपास की फसल को काफी नुकसान हो चुका है। अमरजीत किसान, नांगल पठानी।
इस साल बारिश के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है। बारिश ने सरसों की फसल को नुकसान पहुंचाया हैं। अब दोबारा से बिजाई करनी पड़ेगी। बुआई के लिए दोबारा धन का इंतजाम करना उनके सामने चुनौती बनकर खड़ी है। रोशनलाल किसान, बव्वा।
सरसों की जो फसलें हाल ही बोई हैं, बारिश ने उनको नुकसान पहुंचाया है। सरसों नहीं उगने पर किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ेगी। जहां पर सरसों के पत्ते जमीन से ऊपर आ चुके हैं, वहां पर ज्यादा नुकसान नहीं होगा। दीपक यादव, कृषि अधिकारी।
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