रेवाड़ी। जिला प्रशासन ने इस बार सोलहाराही तालाब के घाट पर छठ पूजा की अनुमति दे दी है। ऐसे में पूर्वांचल सेवा समिति ने छठ पूजा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। समिति ने इस बार आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित करने का संकल्प लिया है। समिति के अनुसार छठ पर्व पर 27 अक्तूबर को शाम को अर्घ्य और 28 अक्तूबर को प्रातः अर्घ्य दिया जाएगा।
पूर्वांचल सेवा समिति के सचिव अश्विनी कुमार, सदस्य हरीश चंद, भोला चौधरी और अरुण कुमार ने बताया कि छठ पर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना को देखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। तालाब परिसर में करीब 125 फीट लंबा स्नान टब बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान व अर्घ्य देने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
समिति की ओर से सफाई, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तथा अन्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा जा रहा है। पदाधिकारियों ने बताया कि तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं, ताकि अंतिम समय में कोई समस्या उत्पन्न न हो।
जल प्रबंधन, सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था, पंडाल सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना भी बनाई जा रही है। आयोजन स्थल पर विशेष स्वयंसेवक तैनात किए जाएंगे, जो श्रद्धालुओं की मदद करेंगे।
समिति ने बताया कि छठ पर्व पर महिलाएं 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखती हैं जो खरना के बाद शुरू होता है। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसे सूर्य देव एवं छठी मैया की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इस व्रत को सबसे कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि इसमें व्रती की इच्छाशक्ति और शुद्धता का कड़ा इम्तिहान होता है। इस दौरान व्रती को चार दिनों तक शुद्ध और सात्विक जीवन जीना पड़ता है, जिसमें प्राकृतिक चीजों का उपयोग और बिना सिलाई के कपड़े पहनना शामिल है। व्रती अपनी मनोकामनाओं, सुख, समृद्धि और संतान की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। यह निर्जला व्रत खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद शुरू होता है और अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होता है।
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का है प्रमुख पर्व
छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्व है, लेकिन अब यह पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने लगा है। रेवाड़ी में भी हजारों की संख्या में पूर्वांचल से जुड़े परिवार निवास करते हैं, जिनके सहयोग और सहभागिता से यह पर्व हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सेक्टर 1 में मनाया जाने वाले छठ पर्व में करीब 6 से 7 हजार लोग छठ महापर्व में शामिल होते हैं। महिलाओं से लेकर पुरूष और बच्चे सभी मिलकर व्रत, गीत और पूजा-पाठ के माध्यम से सूर्य देव और छठी माई की आराधना करते हैं।
श्रद्धालुओं को मिलेगा प्राकृतिक और पवित्र वातावरण
पिछले वर्ष छठ महापर्व का आयोजन अनाज मंडी मार्ग के पास खाली स्थान पर किया गया था। हालांकि उस समय श्रद्धालुओं की भीड़ और सुविधाओं की कमी के चलते कई तरह की चुनौतियां सामने आई थीं। इस बार प्रशासन और समिति दोनों की ओर से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। तालाब परिसर में आयोजन से श्रद्धालुओं को प्राकृतिक और पवित्र वातावरण मिलेगा। साथ ही खुले स्थान और पर्याप्त जगह के कारण बड़ी संख्या में लोगों को आसानी होगी। तालाब के पास ही मंदिर भी स्थित हैं।