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अब मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंचा अहीर कॉलेज जमीन घोटाले का मामला

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रेवाड़ी के अहीर कॉलेज की जमीन घोटाले का मामला अब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दरबार में पहुंच गया है। एक सप्ताह से अहीर कॉलेज की जमीन के मामले ने काफी तूल पकड़ा हुआ है। विपक्ष के प्रत्येक नेता ने इसे बड़े स्तर पर उछाला है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने जमीन खरीद के मामले को लेकर सारी जानकारी लिखित में मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गृहमंत्री अनिल विज, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव को सौंपी है।
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अपने लिखे पत्र में कैप्टन अजय सिंह ने कहा कि अहीर कॉलेज की जमीन की रजिस्ट्री में अनियमितता की गई है। अहीर एजुकेशन बोर्ड से अहीर एजुकेशन प्राइवेट सोसायटी बना ली गई ह। इस सोसायटी के चेयरमैन केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह हैं। अहीर कॉलेज की 200 करोड़ रुपये की जमीन को महज डेढ़ करोड़ रुपये में खरीदकर बड़ा घोटाला किया गया है। जमीन भी उन लोगों से खरीदी गई है जो उसके असली मालिक नहीं हैं। जिन लोगों ने मालिक बनकर जमीन को बेचा है उनको एयू खान एडीजे हिसार द्वारा वर्ष 1938 में ही जमीन के असली मालिक रहे लाला मक्खन लाल का वंशज नहीं माना गया था। उसके बाद उन्होेंने किसी अदालत में दोबारा से याचिका भी नहीं डाली थी। अब किस आधार पर उन्होेंने जमीन को बेच दिया।
कैप्टन ने आगे लिखा कि इन लोगों के खिलाफ कोर्ट में कई मुकदमे चल रहे हैं। रेवाड़ी के पूर्व आयुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने 2009 में एफआईआर दर्ज करने तक के आदेश दिए थे। रजिस्ट्री में जो प्रॉपर्टी आईडी लिखी गई है उसमें सिर्फ 4805 गज जमीन दिखाई गई है, जबकि रजिस्ट्री 105 कनाल की हुई है। साथ ही इसमें प्रॉपटी टैक्स नही भरा गया है। डेवलपमेंट चार्ज नहीं भरा हुआ है।
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सबसे बड़ी बात यह है कि प्रॉपर्टी आईडी को लीज या किराये पर लेने वाला बनवा ही नहीं सकता। प्रापर्टी आईडी को तो केवल मालिक ही ले सकता है तो फिर इन्होंने कैसे बनवा ली। इसके अलावा रजिस्ट्री के अनुसार भूमि का जो पट्टा चढ़ा हुआ है वह 1965 का है। इनके अधिवक्ता उसको 1935 का बता रहे हैं, जबकि हमें जो जानकारी मिली है उसके अनुसार वह 1928 से 2018 तक था।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राव बिरेंद्र सिंह ने 6 अप्रैल 1980 को अहीर एजुकेशन बोर्ड को डिजोल्व करके उसको अहीर एजुकेशन सोसायटी बना ली थी, जिसमें मात्र एक नाम पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राव बिरेंद्र सिंह का था। उसके बाद उन्होंने अपने चहेतों को ही अहीर एजुकेशन सोसायटी में शामिल किया था।
कैप्टन अजय सिंह ने बताया कि सोसायटी में सैकड़ों आजीवन सदस्य थे, उन सभी को निकाल दिया गया और जो सदस्य अब हैें उनमें केवल इंद्रजीत के परिवार के लोग हैं। 1944 से लेकर 1980 तक के सदस्यों की लिस्ट को सार्वजनिक करना चाहिए था, ताकि लोगों के सामने सच्चाई आ सके। लोगों ने खून पसीना एक करके कॉलेज को बनाया था और इसमें सैकड़ों लोगों ने चंदा दिया था, लेकिन राव इंद्रजीत सिंह ने इसे भी नहीं बख्शा। अहीर कॉलेज की मलकीयत को निजी लिमिटेड संस्था बना लिया है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि यह निजी संस्था होने के बाद भी यूजीसी से ग्रांट लेने के साथ सरकार से वेतन ले रही है। अहीर कॉलेज को समाज के लोगों ने मिलकर बनाया था। उन लोगों के नाम के पत्थर भी हटा दिए गए। यहां पर बने हुए अहीर स्कूल को बंद कर दिया और आरबीएस नाम से स्कूल खोल दिया गया। यहां पर भगवती आश्रम होता था, उसको भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा वहां पर लड़कियां शिक्षा ग्रहण करती थीं, जेबीटी कॉलेज होता था, वो सब कुछ बंद कर दिया गया है। इतना ही नहीं दिल्ली में राव तुलाराम कॉलेज होता था, वहां पर टेनिस कोर्ट खोल दिया गया है, जिसका किराया भी राव इंद्रजीत सिंह ले रहे हैं।
मामले में पीसी करने आए संपूर्णानंद को लहूलुहान किया
कैप्टन अजय ने मुख्यमंत्री से कहा कि 22 सितंबर को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खिलाफ मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता करने आए संपूर्णानंद को भाजपा नेता तथा उसके साथियों ने रॉड व डंडों से बुरी तरह से पीटकर लहूलुहान कर दिया। संपूर्णानंद के पास अहीर कॉलेज से संबंधित दस्तावेज थे, इसलिए उसने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। सीएम विंडों के माध्यम से आपको भी इसकी सूचना देना चाहता था।
उन्होेंने कहा कि जब मैं उससे मिलने के लिए पहुंचो तो वह मीडिया के सामने चिल्ला रहा था कि मुझे राव इंद्रजीत सिंह के आदमियों ने मारा है, लेकिन पुलिस ने आईपीसी की धारा 323 व 325 के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को हाथोंहाथ जमानत दे दी। जबकि पीड़ित संपूर्णानंद का गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में दाखिल करवाया है। उन्होंने कहा कि जनता और सरकार के साथ हो रहे इस नुकसान के लिए उचित कार्रवाई करें।
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