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मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की कार्रवाई का नहीं असर, फिर शुरू हुए अवैध ईंट-भट्ठे

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जिले में बगैर लाइसेंस चलने वाले ईंट भट्ठों पर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की छापे मारने की कार्रवाई और एफआईआर का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा। पिछले 20 दिनों के अंदर मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने जिले में 10 ईंट भट्ठा संचालकों पर लाइसेंस रद्द के बावजूद संचालित करने पर एफआईआर दर्ज कराई लेकिन भट्ठों पर ईंटें आज भी पहले की तरह की पक रही है।
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दरअसल, जिले में कुल 92 ईंट भट्ठे है। इनमें 78 प्रतिशत ईंट भट्ठों का 2018 से 2019 के बीच लाइसेंस खत्म हो चुका है। इन भट्टा संचालकों ने अपना लाइसेंस रिन्यू कराने की बजाए ‘सेटिंग’ कर सरकार को चूना लगाने के लिए अवैध रूप से चलाना शुरू कर दिया। इसके अलावा कुछ ईंट भट्ठे ऐसे भी, जिनमें किसी के पास प्रदूषण बोर्ड की एनओसी नहीं तो किसी के पास खनन विभाग की परमिशन नहीं है। उसके बावजूद भट्ठों पर सालों से ईंट तैयार होती रही।
धड़ाधड़ की कार्रवाई
रेवाड़ी में ईंट भट्ठे अवैध रूप से संचालित होने की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने अपने स्तर पर जांच की तो सामने आया कि ज्यादातर ईंट भट्ठे अवैध रूप से संचालत हो रहे है। सबसे पहले बावल के गांव रसियावास में एक साथ 2 ईंट भट्ठों पर छापा मारा। मुख्यमंत्री ने उन तीनों डिपार्टमेंट खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, खनन विभाग व प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी की टीम को भी शामिल किया, जिनके कंधों पर कार्रवाई का जिम्मा है। जांच में दोनों ही भट्टे 2018 के बाद अवैध रूप से संचालित पाए गए।
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एफआईआर के बाद भी भट्ठे चालू
सीएम फ्लाइंग ने 20 दिनों के अंदर जिले में 10 ईंट भट्ठा संचालकों के खिलाफ अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई। साथ ही संबंधित विभाग को भट्ठा बगैर लाइसेंस दोबारा संचालित नहीं होने की हिदायत दी गई। बावजूद इसके अभी भी ये ईंट भट्ठे दोबारा से चालू है। इससे सरकार को हर माह लाखों रुपये का राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही मिट्टी का खनन कर भट्ठा संचालक मुफ्त में मालामाल हो रहे है।
करेंगे सख्त कार्रवाई : डीएफएससी
रेवाड़ी जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अधिकारी (डीएफएससी) अशोक कुमार रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री उड़न दस्ता द्वारा की गई कार्रवाई के बाद भी कुछ भट्ठों के दोबारा से संचालित होने की जानकारी मिली है। ऐसे भट्ठा संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
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