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नौ बसें हुईं कंडम, अब रोडवेज के पास बचीं सिर्फ 138 बसें

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रेवाड़ी। हरियाण रोडवेज के पास धीरे-धीरे बसों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में विभिन्न रूटों पर बसों का संचालन भी प्रभावित हो रहा है। वहीं दूसरी ओर रोडवेज में बसों के संचालन को बढ़ाने के लिए जुगाड़ तकनीक अपनाई जा रही है। इसके तहत बसों में जरूरी सुधार कर संचालन किया जा रहा है। ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। वहीं, आमजन, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने बसें बढ़ाने की मांग उठाई है।
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विभाग के अनुसार 29 मार्च को 9 बसें कंडम होने के बाद सिर्फ 138 बसें ही रह गई हैं। इनमें किलोमीटर की बसें भी शामिल हैं। अब रोडवेज के पास 9 पिंक बसें, 30 किलोमीटर स्कीम की बसें और 99 रोडवेज की बसें हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में 40 और बसें कंडम हो जाएंगी। वहीं नई बसों की बात की जाए तो पिछले 4 सालों में 9 पिंक बसों व किलोमीटर स्किम की बसों के अलावा रेवाड़ी डिपो को अपनी नई बसें नहीं मिल पाई है।
लंबे रूट पर चल रही किलोमीटर स्कीम की बसें
उन्होंने बताया कि 2020 में रेवाड़ी डिपो के पास 25 बसें किलोमीटर की थी। वहीं पिछले साल 5 नई बसें बढ़ाई हैं, जिसके चलते किलोमीटर स्किम के तहत चलने वाली बसों की संख्या 30 हो गई हैं, लेकिन रोडवेज के पास नई बसें न होने के कारण नौ बसें कंडम होने के बाद विभाग के पास अब 99 बसें ही रह गयी हैं।
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कर्मचारी बोले-घटती जा रही बसों की संख्या, भविष्य में होगी परेशानी
रेवाड़ी डिपो में पुरानी बसें भी कंडम होती जा रही हैं। रोडवेज के खेमे में सिर्फ 138 बसें ही बची हुई हैं। ऐसे में कर्मचारी की सुनवाई कौन करेगा। बस ही नहीं रहेगी तो यात्रियों को कैसे सुविधा मिल पाएगी। रोडवेज की ओर से यात्रियों की सुविधा सर्वोपरि है।
यशपाल, राज्य उपप्रधान, हरियाणा परिवहन कर्मचारी संघ
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जुगाड़ लगाकर पुरानी बसों को चलाया जा रहा
नई बसों को लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल भी कर के देख ली, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ है। जो बसें कंडम नहीं हुई हैं, उनमें सुधारकर दोबारा फेरे लगवाए जा रहे हैं। विभाग को नई बसें मिलनी चाहिए। सरकार से यही अपील है कि डिपो को नई बसें दी जाएं।
-प्रवीन यादव, प्रधान, हरियाणा परिवहन संयुक्त कर्मचारी संघ
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बसों की संख्या बढ़े तो बात बने
नई बसों का इंतजार यात्रियों के साथ कर्मचारियों को भी है, लेकिन सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रोडवेज खेमे में बसों की संख्या घटती जा रही है। सरकार रोडवेज को नई बसें दे। बसों की संख्या बढ़े तो बात बनें।
प्रदीप, रोडवेज कर्मचारी
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अभी और बसें कंडम होंगी
सरकार की ओर से पिछले 8 सालों में जो बसें कंडम हो रही थी, उनकी मियाद 2 साल बढ़ा दी गई। मगर अब बसों की संख्या घटती जा रही हैं। लंबे रूटों पर किलोमीटर की बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। सरकार रोडवेज को नई बसें दे।
महेश, रोडवेज कर्मचारी
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निजी बसों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोडवेज बसों की संख्या घटती जा रही है। ऐसा चलता रहा तो निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा नहीं होना चाहिए। रोडवेज बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
चांद सिंह, यात्री
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रोडवेज बसों की संख्या 138 रह गई हैं। जो बसें डिपो के पास हैं, उनका रखरखाव कर चलाया जा रहा है। अभी रोडवेज के पास 9 पिंक बसें, 30 किलोमीटर स्कीम की बसें व 99 रोडवेज की बसें हैं। कोशिश यही है कि यात्रियों को परेशानी न हो। इसलिए हमारी तरफ से पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
-कर्णसिंह, डीआई, रेवाड़ी डिपो
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बॉक्स
विद्यार्थी वर्ग भी कर रहे रोडवेज की मांग
निजी बसों में कई बार सफर किया। बस पास को लेकर ऐसी कोई परेशानी नहीं आई है, लेकिन कई बार अपनी सहेलियों से सुना है कि पास मान्य होते हुए भी उन्हें बस से उतार दिया गया। कई बार उनके रूखे बर्ताव को लेकर भी यात्रियों को परेशानी होती है। रोडवेज की बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
पिंकी, विद्यार्थी
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निजी बस में सफर करना सुविधाजनक नहीं रहा। बस की क्षमता से अधिक यात्रियों को सफर कराया जाता है, जिसके कारण यात्रियों को परेशानी होती है। बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। बस पर तैनात कर्मियों के रूखे बर्ताव के चलते कई बार परेशानी होती है।
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मधु, विद्यार्थी
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