संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन का असली नजारा रेवाड़ी शहर में आसानी से देखा जा सकता है। करीब एक साल पूर्व लंबे समय से नगर परिषद की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार ने शहर को नर्क बना दिया था। अब डोर-टू-डोर कूड़ा उठान के टेंडर की फाइल को निकाय विभाग निदेशालय दबाकर बैठा हुआ है। यह टेंडर लंबे समय से अटका हुआ है। हालांकि नगर परिषद ने चौथी बार इसका टेंडर कर फाइल निदेशालय को भेजी है।
बता दें कि नगर परिषद की डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के टेंडर की फाइल बीते साल की शुरुआत में ही निकाय विभाग के निदेशालय के पास पहुंची थी, लेकिन निदेशालय ने उस पर ऑब्जेक्शन लगा दिया था। उसके बाद चौथी बार टेंडर जारी किए गए, जिसकी अंतिम तारीख 20 मार्च थी। निदेशालय की ओर से हर बार टेक्निकल इश्यू बताकर फाइल काे नकार दिया जाता है। दूसरी ओर हाउस की बैठक में भी बार-बार कूड़े के टेंडर को लेकर हंगामा हो चुका है, लेकिन अभी तक फाइल को स्वीकृति प्रदान नहीं हुई है, जबकि घरों से निकालने वाला कचरा लोगों के शरीर में जहर घोल रहा है।
अस्थायी व्यवस्था में आने लगी भ्रष्टाचार की बू
शहर के लोगों की बार-बार मांग और हाउस की बैठक में हंगामे के बाद नगर परिषद की ओर से घरों से कचरा उठाने के लिए अस्थायी रूप से ट्रैक्टर-ट्राली लगाई गई हैं, जिनमें छोटी-बड़ी दोनों है। इसके बावजूद शहर का कचरा नहीं उठना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। नगर परिषद की ओर से लगाए गए ट्रैक्टर हकीकत में कम और कागजों में ज्यादा कचरा उठा रहे हैं। तंग गलियों में ट्रैक्टरों का घुसना मुश्किल है। नगर परिषद के पास छोटे वाहन भी हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए चालक नहीं हैं। ऐसे में कूड़ा उठाने के नाम पर गोलमाल करने की आशंका जताई जा रही है।
लघु सचिवालय से लेकर पॉश इलाकों में कूड़े के ढेर
शहर के हालात ये हैं कि लघु सचिवालय से लेकर पॉश इलाकों में विधायक आवास, बाजार या कॉलोनी के चारों तरफ कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं। कूड़े का निस्तारण नहीं होने से बदबू उठ रही है। इससे लोगों को मुंह ढककर आना-जाना पड़ता है। शहर में प्रतिदिन करीब 25 हजार घरों से औसतन 100 टन कूड़ा निकल रहा है। डोर-टू-डोर कड़ा उठाने की व्यवस्था ठप है।
सबसे बुरा हाल शहर की घनी आबादी वाले भीतरी मोहल्लों का है। जहां के लोग कूड़े-कचरे के ढेर, सड़ांध और बदबू के बीच जीवन बसर करने को मजबूर हैं। जिस नगर परिषद पर स्वच्छ भारत अभियान को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है। वह अभी तक कचरा प्रबंधन की समस्या का समाधान नहीं कर पाई। शहरी क्षेत्र की स्थिति है कि यहां किसी भी मोहल्ले में पर्याप्त मात्रा में कूड़ेदान उपलब्ध नहीं हैं। इसका नतीजा है कि जहां-तहां कूड़े-कचरा फेंका जा रहा है, इनका उठान नहीं होने के कारण सभी मोहल्लों में सफाई की स्थिति बदतर है। हालांकि प्रशासन द्वारा कूड़ा उठान के वैकल्पिक दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर दावे फेल नजर आ रहे हैं।
मैनें अभी जार्च संभाला है। सफाई व्यवस्था प्राथमिकता रहेगी। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही कूड़े को उठाने के टेंडर कर दिए जाएंगे। लोगों को किसी भी सूरत में परेशान नहीं होने दिया जाएगा। फिर भी कहीं कूड़ा है तो उसे भी जल्द उठवा दिया जाएगा।
-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी।