रेवाड़ी। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के बरसात के मौसम से उपलब्ध होने वाले अतिरिक्त पानी को मसानी बैराज में एकत्रित करने का लाभ आसपास बसे 9 गांवों को मिला है। इन गांवों में भू-जल स्तर 5 से 25 फुट तक बढ़ गया है। बता दें कि वर्ष 2017 से 2021 तक 35 हजार से भी अधिक एकड़ फुट पानी को मसानी बैराज में छोड़ा गया। जिसके फलस्वरूप मसानी बैराज के आसपास बसे 9 गांवों, जोकि जड़थल, निगानीयावास, निखरी, रसगन, खरखडा, रालियावास, भटसाना, डुंगरवास, धारूहेड़ा के भू-जल स्तर में 5 से 25 फीट का सुधार देखने को मिला है। मसानी बैराज जल संरक्षण की कड़ी में क्षेत्र के गांवों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग रेवाड़ी ने वर्षों पुराने सूखे पड़ेे मसानी बैराज में वर्षा का अतिरिक्त जल छोड़ने का कार्य किया। इन्हीं प्रयासों की बदौलत वर्ष 2019 में जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा रेवाड़ी जिले को उत्तर जोन में भू-जल पूनर्भरण श्रेणी में तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
मसानी बैराज को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर
उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार के जल शक्ति अभियान के साथ- साथ हरियाणा सरकार का भी प्रयास है कि मसानी बैराज में वर्षा के अतिरिक्त जल का संचय करने के साथ-साथ इस बैराज को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। जिले में मसानी गांव के नजदीक साहबी नदी पर दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर वर्ष 1979 में मसानी बैराज का निर्माण हुआ था। जिसका उद्देश्य राजस्थान की अरावली पहाड़ियों से आने वाले बारिश के पानी से साहबी नदी में बाढ़ आने से होने वाले जान-माल के नुकसान को रोकना था। साथ ही पानी को रोकने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा हरियाणा व राजस्थान राज्यों के मुख्यमंत्री व उप-राज्यपाल दिल्ली की उपस्थिति में मसानी बैराज बनाने का निर्णय लिया गया था।