बारह महीने में फाल्गुन माह का बड़ा ही महत्व है। इस महीने में आपसी भाईचारे का प्रतीक होली और अगले दिन दुल्हेंडी का पर्व आता है। रंगों का त्योहार होली प्रदेशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है तथा गांवों में इंधन, लकड़ियां, गोबर के उपले इकट्ठे करके होली का डांडा गाड़कर बड़े हर्षोल्लास के साथ होली पूजी जाती है।
हरियाणा के झज्जर जिले के गांव मोहन बाड़ी (झांसवा कलां) में पिछले लगभग 100 साल से होलिका दहन नहीं किया जा रहा है। ग्रामीण लोग आपस में रंग गुलाल लगाकर होली का त्योहार तो मनाते हैं, लेकिन होलिका का दहन नहीं होता है। होली से एक दिन पूर्व गांव की महिलाएं गांव के बीचोंबीच बने बाबा भैया मंदिर में पूजा पाठ करती हैं। होली के दिन गांव में कुछ स्थानों पर गोबर से बने उपले, बिड़कले इकट्ठे करके महिलाएं होली पूजन कर लेती हैं, लेकिन किसी प्रकार का कोई दहन नहीं किया जाता है।
ग्रामीण सूरजभान, बलजीत सिंह ने बताया कि बुजुर्गों के अनुसार, गांव में जब होली दहन हो रहा था कि दो सांड़ लड़ते हुए होलिका दहन में कूद पड़े और उनकी जलने से मौैत हो गई। जिसके बाद से ग्रामीणों ने होलिका दहन बंद कर दिया है। गांव की महिला कृष्णा, भेतरी, संतोष आदि ने बताया कि उपले व बिड़कले इकट्ठा करके वे धोक लगाकर होली पूजा कर लेती हैं तथा रात के समय कोई भी होलिका दहन नहीं होता है।