इसमें पहली कक्षा को पढ़ाने वाले अध्यापक को ही यह दायित्व सौंपा जाना है। ऐसे विद्यालय जहां छात्र संख्या अधिक है, वहां उसके अनुसार अतिरिक्त श्रेणी बनाई जाएगी। बालवाटिका के लिए विद्यार्थी अध्यापक अनुपात 25:3 रहेगा। यह बालवाटिका सभी राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालयों जो सीबीएसई बोर्ड से कक्षा 1 से 12 के लिए मान्यता प्राप्त हैं। उनमें भी संचालित की जानी हैं।
दाखिला एवं कक्षा समय
बालवाटिका में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का दाखिला होगा। उसके बाद साढ़े पांच साल का होने पर बच्चे का पहली कक्षा में प्रवेश हो जाएगा। बालवाटिका का समय विद्यालय आरंभ होने के साथ ही होगा। ताकि ये छोटे विद्यार्थी अपने भाई-बहनों के साथ ही विद्यालय में आ सकें। इनका पठन-पाठन समय खेलकूद गतिविधि, मध्याहन भोजन आदि मिलाकर कुल चार घंटे 30 मिनट का होगा, जिसमें दो बार जलपान और मध्याहन भोजन का अंतराल भी होगा।
मुफ्त मिलेंगे वर्दी, किताबें तथा बैग
इन सभी बालवाटिका में पढ़ने वाले बच्चों को स्टेशनरी, स्कूल बैग और वर्दी शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही पाठ्यपुस्तकें तथा कार्य पुस्तकें भी उपलब्ध करवाई जानी हैं। पाठ्यपुस्तकों की व्यवस्था के लिए एनसीईआरटी द्वारा जादुई पिटारा नामक सामग्री तैयार की गई है। विभाग द्वारा इसके अनुसार ही सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
एनसीईआरटी द्वारा बालवाटिका के साथ-साथ फाउंडेशनल स्टेज 3 से 8 वर्ष के लिए बनाई गई सामग्री जादुई पिटारा पर विशेष प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाया जाना है। 10 दिन के इस प्रशिक्षण में विभाग के पीआरटी को तैयारी कक्षा में सीखना मुख्य रूप से खेल-आधारित शिक्षा पर आधारित होगा, जिसमें संज्ञानात्मक, भावनात्मक और शारीरिक क्षमताओं और प्रारंभिक साक्षरता और संख्या ज्ञान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।