रेवाड़ी। जिले में मंगलवार को सुबह के समय कोहरा छाया रहा। दृश्यता कम होने के कारण वाहनों के पहिये थमे रहे। इस दौरान चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सूर्यदेव के दर्शन के बाद लोगों को ठंड से थोड़ी राहत मिली। दिसंबर के बाद जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ी थी। तीखी सर्दी के तेवर से जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही राहत मिल पाई थी। सोमवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। संभवत: यह इस मौसम का सबसे गहरा कोहरा रहा। वाहन चालकों को दोपहर 12 बजे तक भी वाहनों की लाइट जलाकर ही चलना पड़ा। हाईवे पर तो सबसे ज्यादा परेशानी रही। दौड़ने की बजाय वाहन रेंगते हुए ही नजर आए।
पिछले साल के मुकाबले इस साल एक फरवरी का दिन ज्यादा ठंडा रहा। वहीं पिछले साल 1 फरवरी को अधिकतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि इस बार अधिकतम तापमान 20.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कोहरा ज्यादा पड़ता है तो सरसों में सफेद रतवा की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
गत वर्षों में फरवरी का तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2015 20.6 4.5
2016 21.0 6.5
2017 22.5 7.0
2018 30.2 12.6
2019 17.0 10.0
2020 20.0 4.0
2021 26.5 3.1
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सात दिन का तापमान
तारीख अधिकतम न्यूनतम
26 जनवरी 16.5 2.5
27 जनवरी 18.2 4.0
28 जनवरी 20.0 1.6
29 जनवरी 22.0 2.8
30 जनवरी 23.0 4.5
31 जनवरी 25.0 3.6
1 फरवरी 20.0 8.0
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किसानों की भी बढ़ी चिंता
फरवरी के पहले ही दिन बादल छाने व हवा चलने से क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ी है। किसानों ने बताया कि कहीं बिगड़ता मौसम उनकी आशाओं पर पानी न फेर दे। क्षेत्र में लगभग सरसों की फसल पककर तैयार हो गई है, लेकिन इसपर ओस पड़ेगी तो उनकी फलियां नहीं बनेगी। बारिश होती है तो फसल जमीन पर गिर जाएगी व फसले गलने का भी खतरा है।
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किसान बोले-पुरुवा हवा सरसों की फसल के लिए ठीक नहीं
फरवरी के पहले ही दिन सुबह भारी धुंध और फिर छाए बादलों के साथ चल रही हल्की पुरुवा हवा, जहां सरसों की फसल के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लगभग पक कर तैयार सरसों पर ओस पड़ेगी और बादल छाने से पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा वहीं परवा पवन के चलने से जो सरसों कि फसल फूलों में है उसके फलीयां नहीं बनेगी और फुल गिर जाएगा । साथ ही अगर बारिश होती है तो फसल जमीन पर गिर जाएगी और फसल गलने का भय रहेगा।
-विशवेंद्र यादव, किसान
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अब बिगड़ता मौसम सरसों फसल के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। सरसों जमीन में अधिक नमी होने के कारण जड़ गलन, पोलोरोग लगने की अधिक संभावना बनी जाएगी। अब तो मौसम साफ रहे तो ही अच्छा रहेगा। सरसों में फलियां आनी शुरू हो गई है, अगर बारिश होती है तो किसानों की मेहनत पानी हो जाएगी।
-जगदीश यादव, किसान
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इस समय जो सर्दी पड़ रही है, वह गेहूं सरसों के लिए बढ़िया है, लेकिन छाए बादल सरसों की फसल के लिए सही नहीं है। इससे सरसों फसल में तरह-तरह के लोग लगने का भय रहेगा। साथ ही अगर बारिश होती है तो वह सरसों की फसलों के लिए भारी नुक़सान करेगी। सरसों फसल लगभग पक्की खड़ी है।
अमरजीत, किसान
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इस बार पहले ही दो बार बारिश हो चुकी है। बादलों छाने से क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। इस क्षेत्र के किसानों की सरसों मुख्य फसल है। इससे वह साल भर अपने परिवार का खर्चा चलाता है। मौसम में बदलाव आने से किसानों को चिंतित होना स्वाभाविक है।
-सुरेंद्र यादव
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3 व 4 फरवरी को बारिश की आशंका जताई जा रही है। सरसों की फसल रिप्रोडक्टिव फेस में है। सरसों में फलियां बननी शुरू हो गई हैं। अगर बारिश होती है तो सरसों की फसल हो नुकसान हो सकता है। फसल को लेकर बारिश की जरूरत नहीं है। बारिश नहीं होती है तो फसलों के लिए अच्छा है। इस बार पिछले साल के मुकाबले दिन का तापमान कम होने से ठंड का असर दिख रहा है।
-डॉ. धर्मबीर यादव, क्षेत्रीय निदेशक, क्षेत्रिय अनुसंधान केंद्र बावल