रेवाड़ी। उल्लास योजना के तहत रविवार को जिले के 267 केंद्रों में 2503 परीक्षार्थियों ने साक्षरता परीक्षा दी। इसमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। 607 पुरुषों और 1896 महिलाओं ने परीक्षा दी। परीक्षा तीन घंटे की थी। अभ्यर्थियों को सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा देने की छूट दी गई थी। परीक्षा में 604 पुरुषों और 1896 महिलाओं ने भाग लिया।
इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले लोगों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय शिक्षा संस्थान की तरफ से साक्षरता का प्रमाण दिया जाएगा। जो परीक्षार्थी इस परीक्षा में असफल होंगे, उनको दोबारा दिसंबर में होने वाली परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुसार भारत सरकार ने 2022 से पांच साल की अवधि के लिए न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम उल्लास योजना शुरू की थी। योजना का प्राथमिक उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी को सशक्त बनाना है जो किसी कारणवश शिक्षित नहीं हो सके उन्हें शिक्षित करने का अवसर दिया जा रहा है।
शिक्षा विभाग ने चालू सत्र 2025-26 के लिए 25 हजार 515 लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य तय किया है। लक्ष्य पूरा होने के बाद जिले में केवल कुछ हजार ही निरक्षर बचेंगे जिन्हें अगले एक से दो वर्षों में साक्षर कर दिया जाएगा। मिशन को सफल बनाने के लिए जिले में 331 स्कूलों में उल्लास सेंटर संचालित किए जा रहे हैं जहां निरक्षरों को पढ़ाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि सतत मॉनिटरिंग के जरिए 2027 तक जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का संकल्प पूरा किया जाएगा।
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प्रत्येक कमरे में लगाई गई शिक्षकों की ड्यूटी
परीक्षा को नकल विहीन बनाने के लिए एक-एक कमरे में कई शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। हालांकि, परीक्षा के दौरान जिन सवालों में परीक्षार्थी उलझते नजर आए उसमें शिक्षक उन्हें समझाते नजर आए। परीक्षार्थियों की चेकिंग के लिए दिल्ली से केंद्र सरकार की स्पेशल टीम समय-समय पर सेंटर की चेकिंग करने के लिए पहुंच रही थी।
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वर्जन:
जिले में रविवार को उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में परीक्षा आयोजित की गई। कार्यक्रम के तहत 267 विद्यालयों में 2503 से अधिक परीक्षार्थी ने परीक्षा दी।- मनदीप कुमार, जिला उल्लास कोऑर्डिनेटर, रेवाड़ी।
267 केंद्रों पर 2503 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। परीक्षा में 607 पुरूष और 1896 महिलाओं ने भाग लिया।