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दुखों का पहाड़ टूटने के बाद भी राजा हरिशचंद्र ने सत्य का नहीं छोड़ा साथ

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रेलवे कॉलोनी स्थित रेलवे ड्रामेटिक क्लब रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। विभिन्न समितियों की ओर से रामलीला मंचन जारी है। श्रीघंटेश्वर महादेव मंदिर आदर्श रामलीला की ओर से जहां राजा हरिशचंद्र के नाटक मंचन में कलाकारों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से राम वनवास का नाटक मंचन दिखाया गया, जिसमें कलाकारों ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए माहौल आनंदमय बना दिया।
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जोगन ने वर में मांगा राजपाठ, फिर भी ढाई भार शुल्क रह गया बकाया
श्रीघंटेश्वर महादेव मंदिर आदर्श रामलीला के मंच पर रविवार की रात को सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र के नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुरुग्राम से पधारे प्रेम प्रकाश शर्मा ने रिबन काट कर नाटक का शुभारंभ किया। रामलीला के सचिव यादके सुगंध ने नाटक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पूरे संसार में राजा हरिश्चंद्र की सत्यवादिता के प्रभाव से इंद्र का सिंहासन डोलने लगा तो ऋषि विश्वामित्र ने बताया कि अब वो दिन दूर नहीं जब राजा हरिश्चंद्र का स्वर्ग पर भी राज होगा। इंद्र ने उपाय जानना चाहा तो विश्वामित्र ने इंद्र के साथ मिल कर एक षडयंत्र रचा और उन्होंने अपनी माया से एक जोगन प्रगट की जिसे राजा हरिश्चंद्र के दरबार में गायन के लिए भेजा गया। जोगन ने जब राजा हरिश्चंद्र के दरबार में भजन सुनाया तो राजा इतने आनन्दित हुए कि उन्होंने जोगन को वर मांगने के लिए बोला। जोगन ने हरिश्चंद्र का राजपाट मांग लिया। राजा वचनबद्ध थे। विश्वामित्र के दखल के बाद राजा ने अपनी वेशभूषा सहित अपना राजपाट जोगन के हवाले कर दिया, फिर भी ढाई भार सोना शुल्क बकाया रह गया। जिसे चुकाने के लिए राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी पत्नी तारामती व पुत्र रोहिताश्व को काशी के एक सेठ को बेचना पड़ा और स्वयं को श्मशान के एक चाण्डाल को सौंपना पड़ा। दु:खों का पहाड़ टूटने पर भी उन्होंने सत्य का दामन नहीं छोड़ा। यहां तक कि रोहित की जब सांप के डसने से मृत्यु हो जाती है तो भी वे तारामती से बिना शुल्क लिए अंतिम संस्कार करने से मना का देते हैं। ऐसी परीक्षा की घड़ी में ऋषि विश्वामित्र प्रगट होते हैं और उनकी सत्यवादिता का लोहा मानते हुए, उनका राजपाट वापस उनके हवाले कर देते हैं।
रामलीला के प्रधान श्रीचंद शर्मा व निर्देशक राजेश पंवार ने कलाकारों का परिचय देते हुए बताया कि दिल्ली से पधारे भारत भूषण कश्यप ने राजा हरिश्चंद्र का, गुरुग्राम से पधारे प्रेम प्रकाश शर्मा ने ऋषि विश्वामित्र का, संजय सैनी ने तारामती का, बाल कलाकार साहिल पंवार ने रोहिताश्व का, सुरेश सैन ने इंद्र का, लवली सोनी ने जोगन का, डॉ. सुभाष ने काशी के सेठ का, अमित कश्यप ने सेठानी का व ललित सैनी ने कॉमेडियन चेला नक्षत्र का बेजोड़ अभिनय कर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आज के मंचन में श्रीपति सिंह शेखावत, महेश पटवारी, रमेश वशिष्ठ, श्याम सुंदर गुप्ता, नानक गुप्ता, मनीष, मन मयूर सुगंध, व िकास गुप्ता, विजय पंवार आदि का भरपूर सहयोग रहा। मंच संचालन राजेश वत्स ने किया और दर्शकों को कोरोना के नियमों का पालन करने व पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश दिया।
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पिता का वचन निभाने राम चले वनवास
रेलवे कालोनी में श्रीराम मंदिर रेलवे ड्रामेटिक क्लब की ओर से रामलीला मंचन जारी है। रामलीला का निर्देशन केके सक्सेना कर रहे हैं। पं. मोहनलाल शर्मा के मंत्रोच्चरण के बाद डॉ. रमेश यादव ने रामलीला का उद्घाटन किया। मंचन के दौरान भरत कैकेयीपुर से अयोध्या पहुंच कर जान पाते हैं कि महाराज दशरथ स्वर्ग सिधार गए। प्रभु राम ने पिता के वचन को निभाने के लिए पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण सहित वनवास गमन कर गए। तो वह बहुत दुखी होते हैं और इन सब के लिए अपनी मां कैकेयी को दोषी मानते हैं। भरत अपनी मां द्वारा मांगा गया राज सिंहासन स्वीकार नहीं करते। वे प्रभु राम को लेने चित्रकूट चल देते हैं। उन के साथ गुरु वशिष्ठ, शुत्रघ्न, तीनों रानियां व सुमन्त आदि भी जाते हैं। राम को जब ज्ञात होता है कि उनसे मिलने भरत आए हैं तो बहुत खुश होते हैं। प्रभु राम भरत को समझा कर अयोध्या वापस जाने की आज्ञा देते हैं, जिसको भरत इस बात पर स्वीकार करते हैं कि मैं अयोध्या की गद्दी प्रभु राम की खड़ाऊं से सजाऊंगा और खुद संन्यासियों का जीवन व्यतीत करूंगा। भरत-दिवेश, शत्रुघ्न-रोहित, राम-ब्रिजेश शर्मा, लक्ष्मण-मोहित यादव, सीता-ब्रिजेश, कैकेयी-सागर, कौशल्या-धीरज, सुमित्रा-नीटु गुप्ता, सुमन्त व दूषण-सौरंभ, गुरु वाशिष्ठ-निरिवल रौहिल्या, मंथरा-संजय सौनी, सुपर्नखा-मुकेश भारद्वाज, रवर-सतीश, रावण-राम चरण, मेघनाद-अनुज, राजा-रवि व जितेश ने सराहनीय अभिनय किया।
केवट ने प्रभु श्रीराम को कराई नैया पार
श्रीशिव रामलीला समिति द्वारा रामलीला के 5वें दिन केवट ने प्रभु श्रीराम को अपनी नाव में बैठा कर उनको भवसागर से पार किया। जब वे नगर से होते हुए पहुंचे तो नगरवासियों ने उन्हें रोकने का काफी प्रयास किया। इस दृश्य को देखकर सभी दर्शक भाव-विभोर हो गए। उन्होंने बताया कि जब महाराज दशरथ को राम के वन गमन की खबर मिली तो उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। सभी दृश्य इतने मार्मिक थे कि सभी की आंखों में आंसू आ गए। कार्यक्रम का मंच संचालन पार्षद एडवोकेट भूपेंद्र गुप्ता द्वारा किया गया तथा मीडिया व प्रॉम्टिंग का कार्य एडवोकेट नितेश अग्रवाल ने किया। रामलीला का शुभारंभ हरियाणा बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष पारितोषा शर्मा ने रिबन काटकर किया। रामलीला में दर्शकों को स्वच्छता की शपथ भी दिलवाई गई। कार्यक्रम में रामलीला संस्था के प्रधान अजय मित्तल, नरेश मित्तल, नई अनाज मंडी व्यापार मंडल के प्रधान राधेश्याम मित्तल, उपप्रधान राजेश अग्रवाल, हरकेश यादव, राकेश कुमार, अनिल अग्रवाल, डा. आत्मप्रकाश यादव, प्रभा बरेजा, अलका माकोल, गिरिश सिंघला उपस्थित थे। रामलीला में मंथरा का किरदार पवन डाबला, कैकयी गिरिश गुप्ता, दशरथ कपिलचंद शर्मा, राम आशीष शर्मा, लक्ष्मण नवीन लखेरा, सीता प्रदीप शर्मा, सुमित्रा राजेश सैनी, कौशल्या राजेश, भरत मुकेश चावरिया, शत्रुघन नरेंद्र रामपुरा, सुमंत का किरदार बीडी अग्रवाल, गुरू वशिष्ठ का किरदार प. दलिप शास्त्री, केवट अशोक मुदगिल, डा. श्याम बिहारी, नितिन चावरिया, राजे रामपुरा, दासी उमेश, उज्जवल अपने किरदार में सराहनीय प्रदर्शन किया।

नई अनाज मंडी रामलीला में वनवास के दौरान केवट व राम मिलन का मंचन करते कलाकार।- फोटो : Rewari

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