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चेयरमैन और 13पार्षदों के भाग्य का फैसला आज

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बावल नगर पालिका के चेयरमैन और 13 नगर पार्षद चुनने के लिए ईवीएम से कराए मतदान लेकर मंगलवार की सारी रात 12 चेयरमैन उम्मीदवारों की नींद गायब रहेगी क्योंकि बुधवार को मतगणना होने वाली है। उधर 13 नगर पार्षदों के चुनाव के लिए 37 उम्मीदवारों ने भी अपनी दावेदारी पक्की जता रखी है। हालांकि सबको यह आभास जरूर हो गया है कि वे कितने पानी में खड़े हैं।
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19 जून को कराए चुनाव के लिए तैयार मतदाता सूची में 10995 मतदाता दर्ज हैं लेकिन इस 9300 मतदाताओं ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 1695 मतदाता ऐसे थे, जिनमें काफी बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं थी। कुछ गर्भवती महिलाएं थी। कुछ बीमार थे, इस वजह से अपना मत नहीं डाल पाए। इनके अलावा ऐसे लोग भी मतदान नहीं कर पाए जो सारा दिन उम्मीदवारों के लिए मतदाताओं को लाने ले जाने के काम में जुटे रहने की वजह से मतदान ही नहीं कर पाए। इसके अलावा पांच सौ से अधिक मतदाता शहर से बाहर रहते हैं मगर उन तक उम्मीदवारों की पहुंच नहीं हुई और उन्होंने मतदान करने के लिए बावल आना मुनासिब नहीं समझा। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने पिछली बार मतदान किया, क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज था मगर इस बार उनका नाम राजनीतिक चालबाजी से कटवा दिया गया।
इस चुनाव में कुछ ऐसे सेवारत मतदाता भी हैं, जो दूसरी जगह नौकरी करते हैं और उम्मीदवारों की ओर से उनसे संपर्क नहीं साधा गया और परिवार की ओर से उन्हें किसी को अपना मत देने का आग्रह नहीं किया गया, ऐसी सूरत में 1695 मतदाताओं के मत नहीं पड़े और इसका गहरा असर मत परिणाम पर देखने को मिलेगा। अगर जीत हार का अंतर कम रहा तो दूसरे नंबर के उम्मीदवार हो यह मलाल ताजिन्दगी रहेगा कि उन्होंने अगर थोड़ी मेहनत और कर ली होती तो शायद वे चेयरमैन बन जाते।
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जीत की खुशी में डीजे बजाने, मिष्ठान बांटने की तैयारी
इस चुनाव के कुल 49 उम्मीदवारों में से जीतने वाले उम्मीदवारों ने अपनी जीत की खुशी में डीजे बजाने, मिष्ठान बांटने और स्वागत जुलूस निकालने की तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। चुनाव की खास बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह कोरोना पॉजिटिव हो गए और भाजपा उम्मीदवार शिवनारायण जाट की जीत का सारा भार सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल और जिला भाजपा टीम पर आ गया।
इनका नाम गायब मिला
पिछले चुनाव में सुभाष कौशिक, उनकी पत्नी अल्का कौशिक और उनके छोटे भाई की पत्नी प्रियंका कौशिक का नाम बावल की मतदाता सूची में दर्ज था मगर इस बार इनका नाम गायब मिला और ये वोट नहीं डाल सके।
नोटा
ईवीएम में नोटा का विकल्प इस बार किसी उम्मीदवार की किस्मत खोल सकता है। सेवारत लोगों के वोट भी मतगणना में गिने जाएंगे, जो पहले ही संबंधित व्यक्ति के पास डाक से भिजवा दिए गए थे।
स्ट्रांग रूम के पास कड़ी सुरक्षा
मतगणना से पूर्व की रात होने की वजह से स्ट्रांग रूम के चारों ओर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लगा दी गई है। बुधवार की सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू होने की उम्मीद है।
चेयरमैन पद के 12 उम्मीदवार
शिवनारायण उर्फ लाला जाट : सेवानिवृत्त शिक्षक एवं इस चुनाव से पहले दो बार नगर पार्षद रहे दो पैट्रोल पंपों के मालिक एवं आर्थिक रूप से संपन्न भाजपा उम्मीदवार शिवनारायण को अचानक इस चुनाव में उम्मीदवार बनाना स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को काफी बुरा लगा मगर कहीं विरोध नजर नहीं आया। हालांकि चुनाव परिणाम तय करेगा कि भाजपा उम्मीदवार को पार्टी कार्यकर्ताओं का कितना समर्थन और सहयोग मिला। भाजपा उम्मीदवार चूंकि सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल की पसंद थे इसलिए इनकी जीत का सेहरा और हार का ठीकरा मंत्री के सिर पर आएगा।
दीनदयाल सैनी : पेशे से टायर व्यापारी दीनदयाल सैनी को सैनी समाज से अधिक अपेक्षा थी। 36 बिरादरी के लोगों पर भरोसा करके वे चुनाव मैदान का निर्णय ले गए। सत्ता में भाजपा की सहयोगी जजपा ने दीनदयाल को अपना उम्मीदवार बनाया मगर दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं में गठबंधन होने के बाद दीनदयाल के साथ कुछ जजपा नेता नजर तो आए मगर इसका लाभ कितना मिला, यह चुनाव परिणाम तय करेगा।
चंद्रपाल चौकन : समाजसेवा करते हुए पहले भी एक नगर प्रधान बने। गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ है। इस बार फिर मुकाबले में है।
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एडवोकेट बिरेंद्र महलावत : वकालत के पेशे में हैं। तीन बार पहले भी पार्षद रहे हैं। संपन्न परिवार से हैं। मिलनसार और मृदु भाषी हैं। जनता में अधिक पसंद वाले उम्मीदवार के रूप में उभरे।
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किरण मेहंदीरत्ता : किरण पहली बार नगर चेयरमैन के लिए मुकाबले में हैं। एकमात्र महिला उम्मीदवार हैं। पंजाबी समुदाय होने के बावजूद महिला मतदाताओं पर अच्छी पकड़ है। इनके पति हरीश मेहंदीरत्ता परचून व्यापारी हैं और पहले भी नगर पार्षद रहे हैं मगर एक मामले को लेकर मैदान में नहीं उतरे। जनता पर भरोसा की वजह से मैदान में पत्नी को उतारा।
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रामकिशन महलावत : एबीवीपी से जुड़कर राजनीति में आए। किसान आंदोलन में खूब सक्रिय रहे। पहली बार नगर प्रधान पद के लिए मैदान में उतरे। जाट समाज के मतदाताओं के अलावा 36 बिरादरियों की बात करते हैं। चेयरमैन पद के आरक्षण को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गए।
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हीरा सिंह चौहान : लंबे समय से समाजसेवा करते आ रहे हैं। तीन बार पार्षद चुने गए। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार से हैं। 36 बिरादरी के मतदाताओं के सहारे जीत की आस है।
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प्रदीप शर्मा : कृषि विषय से बीएससी कर रहे हैं। पिता विनोद शर्मा बीज भंडार चलाते हैं। इनलो पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। प्रदीप का यह पहला चुनाव है।
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धर्मवीर कटारिया : वकालत पेशे से धर्मवीर कटारिया के दादा रघबर दयाल सोनी एक बार प्रधान बने थे। इस बार पोता मैदान में है। पिता राजेंद्र सोनी छोटूराम चौक पर मिष्ठान भंडार चलाते हैं।
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सहीराम चौकन : आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार मगर गुर्जर मतदाताओं को लुभाने में भी पिछड़ गए। लोगों की पसंद के मामले में पीछे। आप की झाड़ू से चुनाव प्रचार में दूसरे उम्मीदवारों के वोट बैंक की सफाई नहीं कर पाए। सहकारी बैंक के पास चाय की दुकान चलाते हैं।
सुमेर सिंह जेलदार : जाट समाज के बावल चौरासी के प्रधान हैं। परिवहन विभाग में परिचालक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद समाजसेवा में जुड़े। किसान आंदोलन में सक्रिय दिखे। पहली बार नगर प्रधान पद के लिए मैदान में है।
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