हरियाणा के रेवाड़ी में कोविड मरीज को क्लेम नहीं देने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने एक इंश्योरेंस कंपनी पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही कंपनी को क्लेम की राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है। दो माह के अंदर धनराशि नहीं लौटाने पर कंपनी को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ राशि लौटानी होगी।
एडवोकेट हेमंत कुमार लूथरा ने बताया कि उनकी क्लाइंट शहर के तेजपुरा मोहल्ला निवासी सुनैना मेहता को 13 मई 2021 को कोरोना हो गया था। उनको शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां 10 दिन भर्ती रहने के बाद 23 मई को अस्पताल से छुट्टी मिली थी। सुनैना ने एचडीएफसी एग्रो हेल्थ का जरनल इंश्योरेंस कराया है।
10 दिन भर्ती रहने के बाद जब अस्पताल की ओर से बनाए गए 2 लाख 20 हजार रुपये का बिल क्लेम के लिए डाला गया तो कंपनी ने देने से मना कर दिया। इसके बाद सुनैना ने खुद अस्पताल का बिल अदा किया और इससे संबंधित शिकायत कंपनी के अधिकारियों तक की। कोई सुनवाई नहीं होने पर 17 मार्च 2022 को सुनैना ने अपने एडवोकेट हेमंत लूथरा के मार्फत उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया।
एडवोकेट हेमंत लूथरा ने बताया कि उपभोक्ता फोरम ने तमाम कागजात और सबूत देखने के बाद इंश्योरेंस कंपनी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी की तरफ से तर्क दिया गया कि इलाज का बिल काफी महंगा है। मरीज प्राइवेट वार्ड में भर्ती रही। एडवोकेट लूथरा के मुताबिक उपभोक्ता फोरम ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोविड जैसी बीमारी से ग्रस्त मरीज को अलग से वार्ड में रखना ही जरूरी है।
क्योंकि ये बीमारी किसी और को भी ग्रस्त कर सकती थी। कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी को डिस्चार्ज समरी के बनाए बिल 2 लाख 51 रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित, 11 हजार रुपये वाद खर्च और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही कंपनी को आदेश दिया कि 2 माह के अंदर ये राशि सुनैना को दी जाए। अगर 2 माह के अंदर ये राशि कंपनी ने नहीं दी तो 12 प्रतिशत के ब्याज साथ देनी होगी।