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आज नहाय खाय के साथ छठ पर्व शुरू, कल खरना

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सोलाराही सरोवर में छठ पर्व की तैयारी करते पूर्वांचल समिति के सदस्य। - फोटो : Rewari
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रेवाड़ी। जिले में पूर्वांचल के लोगों द्वारा छठ पर्व को लेकर तैयारी जोर शोर से चल रही है। सोमवार को नहाए खाए के साथ आरंभ हो रहे छठ पर्व का मुख्य आयोजन 10 नवंबर से शुरू होगा 11 नवंबर को सूर्य देव को अर्घ्य के साथ समाप्त होगा। जिले के शहर रेवाड़ी, धारूहेड़ा में छठ पर्व को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
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10 नवंबर को शाम अस्त होते और अगले दिन उगते सूर्य को पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने के लिए कृत्रिम घाट बनाए गए हैं। इन घाटों पर एक साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं के खड़े होकर पूजा करने की व्यवस्था की गई है। इन राज्यों के नागरिकों, विभिन्न संगठनों और जिला प्रशासन के सहयोग से तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर के सेक्टर एक स्थित सोलाराही तालाब में पूर्वांचल सेवा समिति की ओर से इस बार व्यापक स्तर पर आयोजन हो रहा है।
समिति के अश्वनी कुमार ने बताया, पिछले पंद्रह दिनों से साफ सफाई और कृत्रिम घाट निर्माण का कार्य जोर शोर से चल रहा है। इसमें एक साथ सौ श्रद्धालुओं को पूजा अर्चना करने का प्रबंध किया गया है।
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पूर्वांचल छठ पूजा समिति का यह तीसरा आयोजन
इसी प्रकार कोनसीवास रोड स्थित श्रीश्याम वाटिका के समीप पूर्वांचल छठ पूजा समिति की ओर से पिछले दो साल से सामूहिक रूप से छठ पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। समिति प्रधान राजीव यादव ने बताया कि छठ पर्व पर महिलाएं और पुरुष छठ मैया से संतान की प्राप्ति और संतान की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दौरान व्रत रखते हैं। सोमवार आठ नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ पूजा का प्रारंभ होगा। इस दिन व्रत करने वाले लोग स्नान आदि करने के बाद सात्विक भोजन करते हैं। व्रत से पूर्व नहाने के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करना ही नहाय-खाय कहलाता है। इस दिन व्रत करने वाला व्यक्ति लौकी की सब्जी और चने की दाल का सेवन करता है।
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खरना के दिन व्रत करते हैं: नौ नवंबर मंगलवार को छठ पूजा का दूसरा दिन खरना पर व्रती दिन भर व्रत रखते हैं। शाम के समय लकड़ी के चूल्हे पर साठी के चावल और गुड़ की खीर बनाकर प्रसाद तैयार करते हैं। फिर सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद व्रत करने वाले प्रसाद ग्रहण करते हैं। उनके खाने के बाद यह प्रसाद घर के बाकी सदस्यों में वितरित किया जाता है।
तीसरे दिन छठ पूजा का आयोजन: दस नवंबर बुधवार को छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती छठी मइया की पूजा करते हैं और अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर अगले दिन जल्दी उगने और संसार पर कृपा करने की प्रार्थना करते हैं। अस्त होते सूर्य को तीन बार अर्घ्य देते वक्त सूर्यदेव को केला, गन्ना, नारियल और अन्य फल भेंट किया जाता है।
उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर होगा समापन
11 नवंबर को व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन करते हैं। मान्यता है कि इस प्रकार व्रत पूर्ण करने से छठ मैया और सूर्यदेव की कृपा हम पर बनी रहती है और परिवार पर किसी तरह की कोई विपत्ति नहीं आती। इसे व्रत से संतान सुख की कामना भी की जाती है।
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