रेवाड़ी के धारूहेड़ा स्थित लाइफ लांग कंपनी में डस्ट कलेक्टर फटने से झुलसे 2 और लोगों ने दम तोड़ दिया है। अब मृतकों की संख्या कुल 12 पहुंच चुकी है। दोनों श्रमिकों ने शनिवार की सुबह पीजीआई में दम तोड़ा है। मृतकों की पहचान बिहार के जिला सारन के गांव चैनपुर निवासी सल्लू और नंदन नगरी मंडोली निवासी दयाशंकर के रूप में हुई है। दोनों पिछले सप्ताह पीजीआई में भर्ती कराए गए थे।
दूसरी तरफ रेवाड़ी एसडीएम विकास यादव की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कंपनी में डस्ट कलेक्टर के प्रेशर पाइप की सफाई लंबे समय से नहीं की जा रही थी, जिस वजह से गंदगी जमने लगी। उसके बाद एकदम से 16 मार्च की शाम को डस्ट कलेक्टर फट गया। साथ ही यह भी जांच में मालूम चला है कि इससे पहले भी पाइप फट चुका था। मगर उसके बावजूद इस और विशेष ध्यान नहीं दिया गया। कंपनी के श्रमिक राजकुमार ने भी पुलिस को दी शिकायत में डस्ट कलेक्टर का पाइप दो बार फटने की जानकारी दी थी।
जांच में पता चला है कि साथ ही श्रमिक उपलब्ध कराने वाली एजेंसी के संचालक ने भी लापरवाही बरती है। क्योंकि श्रमिकों को दस्ताने, हेलमेट, जूते तथा केमिकल से बचाव के लिब जैकेट नहीं दिए गए थे। जोकि देना जरूरी होता है ताकि अगर इस तरह का कोई हादसा होता है तो मौके पर श्रमिकों का बचाव हो सके।
इस पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि डस्ट कलेक्टर की संख्या कंपनी में चार है। हादसे के वक्त केवल एक ही डस्ट कलेक्टर चल रहा था। उसकी भी सर्विस समय पर नहीं की जा रही थी। टीम जब जांच करने पहुंची तो कंपनी प्रबंधन की ओर से सर्विस और सुरक्षा मनकों की ऑडिट रिपोर्ट भी संतोषजनक नहीं दी गई है। चारों डस्ट कलेक्टर भी उचित स्थान पर स्थापित नहीं किए गए थे। वायरिंग भी ठीक प्रकार से नहीं की थी। जिससे शार्ट सर्किट होने से आग लग गई और धमाका हुआ। यह भी सवाल उठाए गए थे कि कंपनी ने मौके पर इमरजेंसी गेट नहीं खोला था। इस पर जांच में पता चला है कि घटना के वक्त वहां पर सामान जमा था। जिस वजह से गेट नहीं खोला जा सका था और श्रमिक वहीं पर फंस गए।