ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए जिले के स्टीम लोको शेड को पर्यटन स्थल के तौर
पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरकार न केवल आर्थिक मदद करेगी, बल्कि
इसका विश्व में प्रचार भी किया जाएगा।
रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन
चौधरी वीरवार को अपनी पत्नी व हेरीटेज कमेटी की सदस्य डॉ. अताशी के साथ
लोको शेड का दौरा करने आए थे। उन्होंने कहा कि इस शेड में रेलवे से जुड़ी
ऐतिहासिक महत्व के इंजन के साथ-साथ कई वस्तुएं रखी हैं, जिनका विश्व में
प्रचार करना जरूरी है। इसके अलावा इस शेड में ऐतिहासिक महत्व की और चीजों
को भी लाया जाएगा।
लोकोशेड भ्रमण के बाद पत्रकारों से बातचीत में
रेल राज्यमंत्री ने कहा कि रेल देश की ऐसी धरोहर है जो सालों साल बाद भी
अपने अस्तित्व को बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि देश की इसी धरोहर की रक्षा
करना हम सभी का भी फर्ज है। मंत्री ने कहा कि स्टीम हेरीटेज लोको शेड रेलवे
का एक ऐसा ही प्रयास है, जिसमें देश के प्राचीनतम इंजनों को संभालकर रखा
गया है।
उन्होंने साफ किया कि रेलवे देश के अन्य हिस्सों में भी
ऐसे प्राचीन इंजनों की तलाश कर रही है, जिन्हें हेरीटेज में लाया जा सके।
इसके अतिरिक्त रेल के इतिहास से जुड़े अन्य पुराने सामान को भी हेरीटेज में
लाया जाएगा। स्थानीय जंक्शन के विस्तार को लेकर जब रेल राज्यमंत्री से
पूछा गया तो उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रेवाड़ी से होते हुए रेल
फ्रैट कॉरिडोर निकलेगा, जिससे यहां की कायापलट हो जाएगी और औद्योगिक विकास
होने के साथ ही रोजगार भी विकसित होंगे।
अंगद और अकबर संग खिंचवाई तस्वीरें
रेल
राज्यमंत्री ने सेंटर में बने रेल के इतिहास को दर्शाने वाले म्यूजियम का
भी दौरा किया और मौजूद अधिकारियों से जानकारी ली। इसके बाद सीधे हेरीटेज
इंचार्ज के रूम में पहुंचे और वहां पर हेरीटेज के इतिहास को लेकर बनी फिल्म
का लुत्फ उठाया। उन्होंने हेरीटेज सेंटर में खड़े इंजन अंगद और अकबर को भी
देखा तथा तस्वीरें भी खिंचाई। इस अवसर पर उनके साथ सीनियर डीसीएम जयपुर
रतनेश झा, सीसीएम जीसी बुदलाकोटी सहित रेलवे के आला अधिकारी मौजूद थे।
फिल्मों की भी बने हैं शान
रेवाड़ी
स्टीम लोको शेड की स्थापना 1893 में हुई थी। इसके बाद यह बीच में बंद भी
हो गया था। 2010 में इसे दोबारा से खोला गया। इसमें म्यूजियम, लाइब्रेरी
आदि भी बनाई गई। यहां पांच ब्रॉड गेज के इंजन और पांच ही मीटर गेज के इंजन
हैं। पर्यटक गाड़ियों में यहीं से इंजन जाते हैं। फिल्मों में भी इन इंजनों
का इस्तेमाल किया जाता है। गुरु, गांधी-माई फादर, रंग दे बसंती, गदर, भाग
मिल्खा भाग, 1942-ए लव स्टोरी आदि फिल्मों में यहां से गए इंजनों का प्रयोग
हुआ है।