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हरियाणा में राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में मची खींचतान, नेताओं के 'ज्योतिरादित्य' बनने का खतरा

Thu, 12 Mar 2020 05:37 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हरियाणा में राज्यसभाी की दो सीटों को लेकर मचा घमासान
  • दीपेंद्र हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला में मुकाबला
  • बागी सुर उभरने की आहट से सचेत हुआ कांग्रेस आलाकमान  
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Kumari Shalja Vs Randeep Surjewala Vs deepender singh hooda - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन क्या पकड़ा कि अब कई दूसरे नेता भी उनकी राह पर चलने की सोच रहे हैं। खासतौर पर, राज्यसभा चुनाव को लेकर कई दूसरे नेताओं के दिमाग पर 'ज्योतिरादित्य' बनने का भूत सवार हो रहा है। ऐसे कई नेताओं ने तो पार्टी आलाकमान तक अपनी बात पहुंचा दी है।

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इन नेताओं का कहना है कि पार्टी के लिए दशकों से वफादार बने रहे नेताओं को राज्यसभा चुनाव में दरकिनार किया गया, तो वे 'ज्योतिरादित्य' बनने से पीछे नहीं हटेंगे। हरियाणा में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। यहां पर राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है और एक सीट पर उपचुनाव है।

हरियाणा में घमासान

प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं, लिहाजा वह एक सीट जीत सकती है। बशर्तें कहीं कोई क्रॉस वोटिंग जैसा कुछ न हो। भूपेंद्र सिंह हुड्डा चाहते हैं कि उनके पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को राज्यसभा में भेजा जाए, जबकि कुमारी शैलजा समेत कई दूसरे नेता खुद राज्यसभा में जाने की जुगत भिड़ा रहे हैं।

कांग्रेसियों की यही टकराहट कई पार्टी नेताओं को 'ज्योतिरादित्य' का अनुसरण करने के लिए उकसा रही है।


गत वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों को जो सीटें मिली हैं, उसके मुताबिक, राज्यसभा की दो सीटों पर भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। भाजपा ने गुरुवार को दो उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस की ओर से अभी तक किसी का नाम फाइनल नहीं हुआ है। विधानसभा में भाजपा के पास 40 विधायक हैं।

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सरकार में शामिल सहयोगी दल इनेलो के 10 विधायक हैं। सात निर्दलीय विधायक हैं। इनमें से भाजपा छह विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है। जिस सीट पर उपचुनाव होना है, वहां कांग्रेस मुकाबले में नहीं है। वजह, पार्टी के पास अपने 31 विधायक हैं। उसे ये सीट जीतने के लिए 15 और विधायक जुटाने पड़ेंगे।

मौजूदा परिस्थितियों में यह किसी भी तरह से संभव नहीं माना जा सकता। बाकी की दो सीटें, जहां आम चुनाव होना है, उसमें से एक सीट पर कांग्रेस दावा कर सकती है। प्रदेश के एक बड़े नेता का कहना है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस सीट के जरिए अपने बेटे को राज्यसभा में भेजना चाहते हैं।

क्या हुड्डा के आगे झुकेगा कांग्रेस आलाकमान

बता दें कि गत विधानसभा चुनाव से पहले भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए थे। नतीजा, कांग्रेस पार्टी को टिकटों के वितरण में हुड्डा को पूरी तरजीह देनी पड़ी। इतना ही नहीं, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर भी पार्टी को अलविदा कह गए। चुनाव से पहले किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि कांग्रेस पार्टी 31 सीटें जीत सकती है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसका भरपूर फायदा उठाया और कांग्रेस आलाकमान को यह संदेश दे दिया कि प्रदेश में उनका राजनीतिक रसूख कम नहीं हुआ है। उनके दिल्ली स्थित आवास पर हुए होली मिलन समारोह में प्रदेश के दो दर्जन कांग्रेसी विधायक पहुंचे थे। एक तरह से यह शक्ति प्रदर्शन था।

पार्टी आलाकमान तक भी यह जानकारी पहुंचा दी गई थी। हुड्डा का दावा है कि जो विधायक नहीं आए, उनकी कोई मजबूरी रही थी। प्रदेश के सभी 31 कांग्रेसी विधायक एकजुट हैं। हालांकि इन विधायकों में कुलदीप बिश्नोई और किरण चौधरी भी शामिल हैं, जिन्हें कभी हुड्डा खेमे में नहीं माना गया।

हुड्डा चाहते हैं कि उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को राज्यसभा में भेजा जाए, जबकि कुमारी शैलजा जो पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष भी हैं, वे खुद फिर से राज्यसभा में जाने का मन बना रही हैं। एक सीट तो उनका कार्यकाल पूरा होने के चलते ही खाली हो रही है। इनके बीच रणदीप सुरजेवाला भी राज्यसभा के लिए अंदरखाने हाथ-पैर मार रहे हैं। अहीरवाल के भी एक नेता सक्रिय हैं।

क्रॉस वोटिंग बिगाड़ सकती है खेल

कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का भय सता रहा है। अगर उसके सभी विधायक एकजुट होकर अपने उम्मीदवार को पहली पसंद के तौर पर वोट देते हैं, तो पार्टी की जीत सुनिश्चित हो सकती है। यदि किसी ने क्रॉस वोटिंग की तो मामला बिगड़ने के आसार हैं।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा भले ही पूरे 31 विधायक होने का दावा करते हों, लेकिन सच्चाई यह भी है कि पांच छह विधायक उनके प्रभाव में नहीं हैं। कुमारी शैलजा के पास भी तीन ऐसे विधायक हैं, जो उनकी बात मानेंगे।

ऐसे में अगर पार्टी की ओर से कोई सर्वसम्मत उम्मीदवार नहीं उतारा जाता, तो क्रॉस वोटिंग की पूरी संभावना बनी रहेगी। 2016 के राज्यसभा चुनाव में स्याही कांड हो गया था, इसके चलते कांग्रेसियों के वोट रद्द करने पड़े थे।

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