विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य में मंगलवार को नीमका जेल में प्रस्तावित एचआईवी जांच की अनुमति जेल प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी। इसका कारण कैदियों की गोपनीयता बताया गया। इसके बाद विभाग ने जेल परिसर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
जेल प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, एचआईवी संक्रमण को लेकर कैदियों में भय की स्थिति न बन जाए और जांच के बाद कैदी एक-दूसरे से भेदभाव न करें, इसे लेकर सावधानी बरतते हुए जेल में ‘आन द स्पॉट’ जांच नहीं की गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने बल्लभगढ़ अस्पताल में सभी कैदियों की बारी-बारी से जांच कराने का प्रस्ताव रखा है।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जेल में जनवरी से अब तक टीबी के 25 मरीज आ चुके हैं। इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड ट्रेनिंग सेंटर काउंसलर ने बताया कि टीबी और एचआईवी एक-दूसरे से जुड़ी बीमारियां हैं। एचआईवी वायरस होने पर टीबी ठीक होने में सामान्य से ज्यादा समय लगने की आशंका होती है। इसलिए सभी टीबी मरीजों की एचआईवी जांच भी की जाती है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. बीना शर्मा ने बताया कि मंगलवार को जेल में एचआईवी वायरस से बचाव के तरीके बताए गए।