एसडी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार हेतू राष्ट्रीय परिषद (एनसीएसटीसी) एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की उत्प्रेरणा में तथा इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र के संयोजन से दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस इरादा एनजीओ के जनरल सेक्रेटरी राजपाल पांचाल, भिवानी से पधारे रिसोर्स पर्सन रणसिंह और कार्यकर्ता प्रतीक सैनी एवं पंकज कुमार ने विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं को विज्ञान के पीछे छिपे रहस्यों को उजागर करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
इंडियन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन (इरादा) कुरुक्षेत्र का उद्देश्य कबाड़ से जुगाड़ बनाकर विज्ञान के ऐसे मॉडल विकसित करना है जो न सिर्फ बहुत ही सस्ते होते है बल्कि स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विज्ञान सरलता के साथ समझाने में भी सक्षम होते है। आज के दिन भी रंगों के सिद्धांत, बर्नोली का सिद्धांत, सुई का पानी पर तैरना, साइफन, फोटो सिंथेसिस इत्यादि जैसे वैज्ञानिक प्रयोग छात्र-छात्राओं को सिखाए गए। मनोरंजक और सजीव संवाद में प्राध्यापकों ने भी ललक के साथ इस कार्यशाला में हिस्सा लिया।
प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा और भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश सिंगला ने मेहमानों का स्वागत किया। उनके साथ डॉ. रवि रघुवंशी, डॉ. राहुल जैन, डॉ. रेखा रानी, डॉ. एसके वर्मा, प्रो. मयंक अरोड़ा, डॉ. बलजिंदर सिंह, डॉ. चेतना नरूला और दीपक मित्तल भी उपस्थित रहे।
रिसोर्स पर्सन रणसिंह ने कहा कि यह कार्यशाला लक्ष्याधारित प्रशिक्षण मॉडयूल है जिससे विद्यार्थियों को बुनियादी कौशल प्राप्त होगा और वे विज्ञान के पीछे के चमत्कारों की जांच खुद अपने हाथों से कर पाएंगे। उन्होनें कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों को विज्ञान में करियर चुनने हेतू प्रोत्साहित करने के लिए ही विभिन्न प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यों के बारे में उन्हें संवेदनशील एवं जागरूक किया जा रहा है।
प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वैज्ञानिक बनकर शोध करने के लिए किसी भी तरह की औपचारिक शिक्षा का होना कोई जरूरी नहीं है। कितने ही महान वैज्ञानिक इस धारणा को गलत साबित कर चुके है। इस कार्यशाला का उद्देश्य भी यही है कि हम सभी अपने अंदर छुपे उस वैज्ञानिक को पहचान पाए और विज्ञान को अपना भी योगदान दे पाए।
जनरल सेक्रेटरी राजपाल पांचाल ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में शुद्ध विज्ञान के रूप में शैक्षिक और करिअर विकल्प को चुनने में जागरूकता एवं रुचि का निर्माण करना है। ये कार्यशाला इंटरैक्टिव है। इसलिए इसका लाभ भी जल्द और ज्यादा होगा। उन्होंने प्राध्यापकों का आह्वान किया कि वे भी अपनी कक्षाओं को और अधिक रोचक बनाने के लिए रोचक एवं क्रियाशील मॉडल का इस्तेमाल करें।