पानीपत। करीब पांच महीने बाद तीन घंटे तक चली नगर निगम सदन बैठक में छह बार निगम अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। हंगामे के बीच निगम व प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तावित करीब 200 एजेंडों में से चार को लंबित रखा गया, जबकि 196 विकास कार्यों की मंजूरी पर मुहर लगी। बैठक में शहर के विकास से लेकर सफाई तक के कई बड़े मुद्दों पर फैसले भी लिए गए।
जनप्रतिनिधियों ने निगम अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कई बार भ्रष्टाचार करने के मुद्दों पर भी घेरा। एक अधिकारी की तो भ्रष्टाचार में अत्यधिक संलिप्तता को देखते हुए उसकी ज्वाइनिंग तक करवाने से मना कर दिया गया। अंत में स्ट्रीट लाइट को लेकर जब निगम पार्षद हाउस की मीटिंग में पहुंचे तो हाउस प्रतिनिधियों ने बैठक ही छोड़ दी। शहर के बड़े विकास कार्यों को लेकर तो कभी सफाई व्यवस्था पर पार्षदों में आपसी बहसबाजी भी देखने को मिली। उन्होंने एक-दूसरे पर भी आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए।
अब चार जोन में बांटकर अलग-अलग टेंडर निकालकर होगी शहर की सफाई
खास बात ये रही कि अब शहर की सफाई चार जोन में बांटकर होगी। इसी हिसाब से शहर के 26 वार्डों को चार भागों में बांट कर टेंडर लगाए जाएंगे। जीटी रोड से पूर्व की दिशा में वार्ड 1 से 14 तक को सात-सात के दो जोन में बांटा जाएगा। वहीं, जीटी रोड से पश्चिम दिशा के 15 से 26 तक के 12 वार्डों को छह-छह वार्डों के दो जोन बनाकर टेंडर लगाए जाएंगे। जब तक नए टेंडर नहीं लग जाते तब तक पुराने ठेकेदारों से ही काम करवाया जाएगा। इसके लिए हर महीने करीब ढाई करोड़ रुपये का बजट एस्टीमेट बनाया गया है, जो सालाना करीब 30 करोड़ का होगा। इसके अलावा 22 साल के अनुबंध वाली जेबीएम का काम भी जारी रहेगा व नगर निगम के 565 पक्के कर्मचारी भी काम करते रहेंगे। हालांकि कई पार्षदों ने जोन वार टेंडर लगाने की जगह वार्ड वार टेंडर लगाने की मांग की।
एक करोड़ से ऊपर के विकास कार्यों का भुगतान एमसी फंड से नहीं होगा
निगम ने अपने एजेंडों में तीन सड़कों के प्रस्ताव पास किए थे, जो करीब साढ़े छह करोड़ के थे। इनको नियमानुसार अमरूत योजना के द्वारा बनाया जाना था जबकि निगम तकनीकी पेंच उलझाकर इन्हें एमसी फंड से बनवाना चाहता था। इस पर हाउस ने आपत्ति जता दी कि वे म्युनिसिपल कारपोरेशन (एमसी) फंड से इस काम को नहीं होने देंगे। सदन प्रतिनिधियों के सामने इसमें कई उलझनें आईं। कभी ग्रामीण एरिया तो कभी शहरी एरिया होने के कारण निगम फंड को पैसा वहां लगाने की तो कभी बड़े टेंडर एमसी फंड से होने के बाद छोटे टेंडरों के लिए पार्षदों को निगम अधिकारियों के मुंह ताकने की बात आई। जिस पर फैसला लिया गया कि कोई भी काम जो करोड़ रुपये से ऊपर होगा उसकी पेमेंट एमसी फंड से नहीं होगी। इसके लिए दूसरी अन्य योजनाओं के भरोसे रहना पड़ेगा।
टैक्स, एनडीसी 7 दिन में, एक छत के नीचे होगा काम, पहले लंबित काम निपटाए जाएंगे
संपत्ति कर, एनडीसी, संपत्ति पहचानपत्र से संबंधित फाइलों के लिए अब शहर के लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा। इसके लिए निगम ने राइट टू सर्विस एक्ट के तहत सात-सात दिन का समय निर्धारित किया है। इसके लिए एक छत के नीचे सभी कामों को करने का प्रबंध भी किया जाएगा। इसी हिसाब से निगम अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। मैनपावर भी बढ़ाई जाएगी। लेकिन इससे पहले निगम को पिछली बकाया करीब एक हजार फाइलों का निपटान करना होगा। इसके लिए आयुक्त के निगम अधिकारियों व कर्मचारियों को आदेश जारी किए हैं कि वे शनिवार व रविवार को भी लंबित फाइलों को निपटाने का काम करेंगे।
शहर से जुड़े कुछ खास मुद्दे, जिन पर लगी मुहर
- तीन निगम कार्यालयों को सचिवालय की 2500 वर्ग मीटर जमीन पर बनाया जाएगा, ताकि लोगों को अलग अलग कार्यालय में धक्के न खाने पड़े। इसके लिए उपायुक्त से पत्राचार किया जाएगा।
- 70 प्रतिशत से ज्यादा बसी कई कॉलोनियों को नियमित करवाने के लिए सरकार को पत्राचार किया जाएगा, हालांकि शहर में किसी भी अवैध कॉलोनी को पनपने नहीं दिया जाएगा।
- सब डिवाइड पॉलिसी, श्रेणी बदलने और एनडीसी संबंधित योजना लाई जाएगी, जिससे लोगों को नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) लेने में परेशानी न हो या फिर पहले वाली स्कीम लागू करवाई जाएगी।
- शहर के सीवरों की सफाई के लिए 15 दिन में दो जेटिंग मशीन जन स्वास्थ्य विभाग से विचार कर मंगवाई जा रहीं हैं, जिससे सीवरों की ब्लॉकेज को खोला जा सकेगा।
- 2 सप्ताह में प्रधानमंत्री आवासीय योजना के लाभार्थियों को उनकी बकाया किस्तों को भुगतान किया जाएगा।
- रिफाइनरी द्वारा 1111 फ्लैट बनाए जाएंगे, इसके लिए निगम ने बरसत रोड पर ढाई एकड़ जमीन को चिह्नित किया है।
- वार्ड नंबर 6 बबैल रोड की 2200 गज जमीन पर सरकारी स्कूल बनाया जाएगा।
- जेबीएम कंपनी के काम के खिलाफ लिखित में शिकायत देकर उनका भुगतान रुकवाने का काम किया जाएगा।