पानीपत। नूंह में हुई हिंसा में 16 साल के बच्चों के हाथ में मशीन गन थी। महिलाएं पेट्रोल बम फेंक रही थीं। पहले उपद्रवियों की संख्या 40 थी फिर 150 हुई और अंत में एक साथ पांच सौ उपद्रवी इकट्ठा होकर आ गए। एक बार तो लगा कि अब हम नहीं बचेंगे। पुलिसकर्मी भी उपद्रवियों को देखकर भाग गए थे, लेकिन हमारे साथ भोले शंकर थे। हमने उपद्रवियों का डटकर सामना किया। करीब तीन घंटे तक उनके सामने डटे रहे। पुलिस कंट्रोल रूम और नेताओं तक को फोन किए। उनको हम पत्थर बरसने और गोलियां चलने की बात कहते रहे। इतना कुछ होने पर भी करीब साढ़े तीन घंटे बाद शाम साढ़े पांच बजे पुलिस पहुंची। यह दर्द नूंह हिंसा में घायल वार्ड-11 निवासी राहुल ने बयां किया।
राहुल ने बताया कि मैं तीन साल से बजरंग दल से जुड़ा हुआ हूं। अपने साथियों के साथ शिवमंडल की यात्रा में गया था। वे नलहड़ मंदिर से दर्शन कर दूसरे मंदिर की तरफ जा रहे थे। इसी बीच उपद्रवियों ने उनके आगे चल रही एक बस में आग लगा दी। उसके बाद तीन तरफ से उन पर पथराव होने लगा। उन्होंने किसी तरह उपद्रवियों का सामना किया। किसी तरह बसों को वहां से निकलवाया और वापस नलहड़ मंदिर तक पहुंचा। महिलाओं और बच्चों को मंदिर में सुरक्षित पहुंचा उनकी सुरक्षा में मंदिर के बाहर डटकर खड़े हो गए। उन पर पथराव हुआ, गोलियां चलाई और पेट्रोल बम दागे गए। मेरे अलावा पानीपत, भिवानी समेत अन्य जिलों के 40 से 50 लोग ही थे। उपद्रवी पहले 40 थे, तब तक वह डटे रहे। फिर 150 हुए और पत्थर की जगह गोलियां चलाने लगे तो एक बार हौसला टूटने लगा। आधे घंटे में उपद्रवियों की संख्या 500 पार हो गई। जिनमें महिला, बच्चे, पुरुष व बुजुर्ग तक शामिल थे। पुलिसकर्मी उन्हें छोड़कर भाग गए। वह साढ़े पांच बजे आए। तब तक सैकड़ों लोग घायल हो चुके थे।
अशोक विहार कॉलोनी निवासी कुशाल ने बताया कि उपद्रवी उन पर सीधे गोली चला रहे थे, लेकिन पुलिसकर्मी उपद्रवियों को डराने के लिए सिर्फ हवाई फायर करते रहे। उपद्रवियों के हौसले बुलंद थे। उन्होंने एक पुलिसकर्मी के ही पैर में गोली मारी।
विराट नगर निवासी सीमा ने बताया कि उपद्रव में शामिल महिलाएं उन पर पेट्रोल बम फेंक रही थीं। किशोर पथराव के अलावा एसिड अटैक कर रहे थे। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने उनकी रक्षा की और मंदिर में सुरक्षित पहुंचाकर बाहर रक्षा में खड़े हो गए।