गन्ना खत्म होने से मिल बंद हो गई है। दूसरे जिलों के गन्ने की भी पेराई की गई है। अब तक 65 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है, अब नो केन हुआ तो सीजन खत्म होगा। उससे पहले प्रदेश भर के किसानों के लिए पानीपत मिल में गन्ना पेराई का मौका है।
हरियाणा के पानीपत के डाहर गांव स्थित शुगर मिल प्रदेशभर के गन्ना उत्पादक किसानों को गन्ना पेराई का एक और मौका दे रही है। प्रदेश में किसी जिले का कोई किसान अपने गन्ने की पेराई नहीं करा पाया है तो वह पानीपत की नई शुगर मिल में गन्ना पेराई के लिए आ सकता है। मिल अब तक सोनीपत, गोहाना और रोहतक के किसानों के लाखों क्विंटल गन्ने की पेराई कर चुकी है।
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वहीं, पानीपत के किसानों का गन्ना पेराई किए तो दो सप्ताह बीत चुके हैं। अब फिर से दूसरे जिलों के गन्ना उत्पादक किसान मिल में गन्ना लेकर पहुंच रहे हैं। इसे देखते हुए मिल प्रबंधन ने एक बार फिर मिल को चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मंगलवार को गन्ने का स्टॉक पूूरा होने पर मिल को दोबारा चलाया जा सकता है, लेकिन खास बात यह है कि अगर अबकी बार गन्ना खत्म होता है तो दोबारा मिल को नहीं चलाया जाएगा। एक बार मिल चलने के बाद जब तक स्टॉक में गन्ना रहेगा, मिल चलती रहेगी।
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पानीपत मिल की पेराई क्षमता 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन की है। मिल एक माह में 15 लाख क्विंटल गन्ना पेराई कर सकती है। प्रदेश में सबसे ज्यादा गन्ना इसी मिल ने पेराई की है। मिल के एमडी नवदीप सिंह का कहना है कि शुगर मिल जिले के करीब 62 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई तो पांच अप्रैल तक ही पूरी कर चुकी है।
इसके बाद अब दूसरे जिलों का गन्ना पेराई किया जा रहा है। सोनीपत, गोहाना और रोहतक के किसानों का तीन लाख क्विंटल से ज्यादा गन्ना पेराई हो चुका है। अब भी वे दूसरे जिलों से आने वाले गन्ना उत्पादक किसानों की बाट जोह रहे हैं।
जब गन्ने का स्टॉक पूूरा हो जाएगा तो एक बार फिर से मिल को चला दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मिल सीजन सत्र का अंतिम चरण होगा। इसके बाद अगर शुगर मिल नो केन होता है तो मिल का सत्र पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाएगा।