पानीपत। 12 से 17 दिसंबर तक चले खसरा खोज अभियान के तहत तीन बच्चे खसरा रोग से ग्रस्त मिले हैं। इसके साथ ही अब जिले में खसरे के चार रोगी हो गए हैं। उन्हें सिविल अस्पताल रेफर किया गया है। एक केस नौ दिसंबर को शहर में मिला था। अभियान के तहत लगभग पांच हजार लोगों को टीका भी लगाया लगा। एएनएम और आशा वर्करों ने डोर टू डोर बच्चों की जांच की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले ढाई साल में कोरोना के कारण कई बच्चों को खसरा रोधी टीका नहीं लगा था। इसलिए यह अभियान चलाया गया था। इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था।
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि खसरे के जिले में तीन केस मिले हैं। इससे उसके इर्दगिर्द लगने वाले अन्य घरों में भी संक्रमण की आशंका रहती है। इसलिए इनके आसपास के बच्चों का भी टीकाकरण किया गया है। खसरे को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। अब समय-समय पर खसरा खोज अभियान भी चलाया जाएगा। खसरे से संक्रमित एक बच्चा आसपास के 20 बच्चों को संक्रमित कर सकता है।
खसरा रोग : बीमारी से होने वाली बच्चों की मौत में 90 प्रतिशत खसरा ही वजह है। यह अत्याधिक संक्रामक रोग है। संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने से यह फैलता है। तेज जुकाम होने के तीन-चार दिन बाद शरीर पर चकत्ते दिखने लगते हैं। खसरा के कारण बच्चे को कान का संक्रमण, डायरिया, निमोनिया भी हो सकता है। मस्तिष्क में सूजन और जलन (इंसेफेलाइटिस) भी हो सकती है
खसरे के लक्षण-
बुखार के साथ-साथ नाक बहना, आंखें लाल, शरीर पर दाने, गला खराब आदि लक्षण होते हैं। अगर छोटे-छोटे दाने और बुखार है तो उसे संदिग्ध माना जाता है। बच्चों से गर्भवती महिलाओं को संक्रमित होने का खतरा ज्यादा रहता है।