इसराना के गांव पलड़ी के निकट कुछ बदमाशाें ने अनाज मंडी में धान डालकर लौट रहे एक सैनिक की हत्या कर उसका शव खेताें में फेंक दिया।
बदमाश उसका ट्रैक्टर और दो ट्रालियां लेकर फरार हो गए। बाद में उसकी पहचान मांडी निवासी कर्मपाल के रूप में हुई। वह भारतीय सेना में जम्मू में तैनात था और छुट्टियाें में घर आया था। पुलिस और एसएफएल की टीम ने मौके पर घटना का जायजा लिया।
पुलिस ने मामला दर्ज कर बदमाशाें की तलाश शुरू कर दी है। वहीं मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम करा उसके परिजनाें को सौंप दिया। सैनिक की हत्या के बाद से गांव में मातम पसरा है।
गांव मांडी निवासी कृष्ण कुमार ने बयान दिया कि उसका छोटा भाई कर्मपाल (25) की भारतीय सेना की 20जाट रेजिमेंट में मेंढर, जम्मू क्षेत्र में तैनाती थी। कुछ दिन पूर्व कर्मपाल घर छुट्टी पर आया था और नौ दिसंबर को वापस जाना था।
सोमवार को कर्मपाल उसके साथ ट्रैक्टर और दो ट्रालियाें में धान की जिंस भरकर पानीपत की अनाज मंडी में बेचने गया था। वापसी पर उसने कर्मपाल को ट्रैक्टर और ट्रालियां लेकर घर रवाना कर दिया था। देर रात तक जब कर्मपाल घर वापस नहीं पहुंचा तो परिजनाें ने आसपास के क्षेत्र में उसकी तलाश शुरू कर दी, मगर रातभर इधर-उधर भटकने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लगा।
मंगलवार सुबह पलड़ी गांव के पास सड़क के पास खेत में एक शव मिलने की सूचना पर वे मौके पर पहुंचे तो उसकी पहचान कर्मपाल के रूप में हुई।
खेत मालिक ने दी सूचना
खेत मालिक शीशपाल निवासी पलड़ी ने बताया कि उसके खेत में सबमर्सिबल ट्यूबवेल लगाने का काम चल रहा है। मंगलवार सुबह जब वह मिस्त्रियों के लिए खेत में चाय लेकर पहुंचा तो खेत में एक युवक का शव था। इसके सिर और मुंह पर चोटों के निशान थे। शव देखते ही उसने मामले की सूचना तुरंत इसराना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर डीएसपी वीरेंद्र दलाल, एसएचओ अजीत सिंह और एसएफएल की टीम मौके पर पहुंची और घटना स्थल पर जायजा लिया।
जेब में रखे रुपये सुरक्षित मिले
मृतक के भाई कृष्ण कुमार ने बताया कि पानीपत से जब कर्मपाल घर के लिए निकला उसने उसे पांच हजार रुपये दिए थे। रास्ते में उसने ट्रैक्टर में पंप से तेल डलवाया, बाकी पैसे उसकी जेब में मिल गए। बदमाश कर्मपाल की हत्या कर महेंद्रा कंपनी का ट्रैक्टर और दो ट्रालियंा ले गए।
दो बच्चियों के सिर से उठा पिता का साया
मृतक कर्मपाल की मौत की खबर से घर और गांव में मातम पसर गया। तीन वर्षीय इशिका और एक साल की जाह्नवी इस बात से बेखबर थी कि उनके सिर से उसके पिता का साया उठ चुका है, जो उनके रोने पर प्यार से उन्हें मनाता था और खाने के लिए चीजें लाकर देता था। पत्नी सुषमा का रो-रो कर बुरा हाल था। बड़े भाई कृष्ण के भी आंसू नहीं रुक रहे थे।
वर्जन
गांव पलडी के पास एक खेत में शव मिलने की खेत मालिक ने दी थी। सूचना पर मौके पहुंचे। शव की शिनाख्त मांडी निवासी सैनिक कर्मपाल के रूप में हुई। मृतक के भाई कृष्ण के बयान पर लूट के इरादे से हत्या का मामला दर्ज किया है। शव का पोस्टमार्टम पानीपत के सरकारी अस्पताल में कर परिजनों के हवाले कर बदमाशों की तलाश शुरू का दी है।
अजीत सिंह, थाना प्रभारी, इसराना
रातभर परिजन काटते रहे थानों के चक्कर
मेंढर में दुश्मनों को नाकों चने चबाने का दंभ भरने वाले फौजी कर्मपाल की तलाश कर रहे परिजनों को पहले पुलिस और हत्या के बाद पोस्टमार्टम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने खूब छकाया।
कंट्रोल रूम में सूचना के बावजूद परिजनों को रात भर थानों के चक्कर लगाने पड़े। दूसरी ओर डॉक्टर ने भी पुलिस हवाला देकर पोस्टमार्टम करने से हाथ खड़े कर दिए और शव को पीजीआई रोहतक भिजवाने लगे।
पुलिस और डॉक्टरों की मनमर्जी से परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ी। दोपहर बाद ही शव का पोस्टमार्टम हो सका। गांव में मांडी में तहसीलदार राजकुमार भौरिया और डीएसपी वीरेंद्र दलाल की मौजूदगी में सैनिक का अंतिम संस्कार किया।
रात भर लगाए थानों के चक्कर
सैनिक कर्मपाल के भाई कृष्ण ने रात 11 बजे कंट्रोल रूम पर फोन कर मामले की सूचना दी। परिजनों ने बताया कि कंट्रोल रूम में सुबह तक कर्मपाल के आने का इंतजार करने का जवाब दिया। कृष्ण इसके बाद नौल्था मोड़ पर पहुंचा। यहां एक पीसीआर पर तैनात पुलिसकर्मियों को मामले की जानकारी दी।
यहां पुलिसकर्मियों ने कृष्ण को थाना चांदनी बाग में जाने की सलाह दी। वह यहां से चांदनी बाग थाना पहुंचा और पूरा मामला बताया। थाना चांदनी बाग पुलिस ने मामला किशनपुरा चौकी का बताया और परिजनों को वहां पर भेज दिया। यहां पर कृष्ण से उसके भाई का नाम और पता पूछकर घर जाने की कह दी।
डॉक्टरों ने कहा वे एक्सपर्ट नहीं
सिविल अस्पताल के डॉक्टरों का बोर्ड भी सैनिक कर्मपाल का पोस्टमार्टम करने से पीछे हट गया। कर्मपाल के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए डा. योगेश और डॉ. नताशा का बोर्ड बनाया। दोनों डॉक्टर पुलिस की ओर से पूछे चार सवालों पर पीछे हट गए और शव को पीजीआई रोहतक रेफर करने लगे।
डॉक्टरों का कहना था कि उनके पास सवालों के जवाब देने वाला एक्सपर्ट नहीं है। पीजीआई रोहतक में एक्सपर्ट हैं और आसानी से पोस्टमार्टम हो जाएगा।
पोस्टमार्टम के लिए दिखाने पड़े संबंध
परिजन पहले पुलिस और फिर डॉक्टरों की बात सुनकर आक्रोशित हो गए। उन्होंने अपने संबंधों का इस्तेमाल शुरू कर दिया और चंडीगढ़ से एक उच्च अधिकारी का फोन आने पर डॉ. राघवेंद्र को बोर्ड में शामिल किया। इसके बाद डॉक्टरों सवालों को देख पीछे हट गए। मामला बढ़ने पर सर्जन संजीव गोयल को बोर्ड में शामिल किया और फिर दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम हो सका।
पुलिस ने पूछे थे ये सवाल
मृतक के शरीर पर लगे चोट के निशान मौत के पहले के हैं या बाद के।
तेजधार हथियार से चोट मारनी प्रतीत होती या नहीं।
मौत का समय क्या रहा होगा।
मृतक के नाखूनों का परीक्षण कर बताया जाए कि इनमें बाल, खाल या खरोंच के निशान तो नहीं।
गर्दन और उससे ऊपर दस निशान
फौजी कर्मपाल पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ हमले किए थे। उसकी गर्दन और उसके ऊपर चाकुओं के 10 वार हैं। उसकी दोनों आंखों और कान के साथ गर्दन पर भी चाकुओं के वार हैं। इससे पहले कर्मपाल ने हमलावरों से बचने का भी प्रयास किया। वह सबमर्सिबल से निकलने वाले रेत में धंस गया और यहां हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए। यहां पर एक टोप और जुराब मिली हैं। जो हमलावरों की मानी जा रही हैं।
नौकरी के बाद पहली बार चलाया था ट्रैक्टर
कर्मपाल ने जाट रेजिमेंट में नियुक्ति के बाद पहली बार ट्रैक्टर चलाया था। कृष्ण ने बताया कि कर्मपाल जून 2008 में भर्ती हुआ। वह फिलहाल जम्मू के मेंढर में तैनात था। वह भर्ती होने के बाद हर साल घर आया। लेकिन उसने कभी ट्रैक्टर नहीं चलाया।
कर्मपाल सोमवती अमावस्या होने पर पत्नी सुषमा और दोनों लड़कियों इशिका और विशु को मोटरसाइकिल पर यमुना में स्नान कराकर लाया था। उसके आने के बाद वह धान से भरी ट्रालियां लेकर चलने लगा तो कर्मपाल ने उसको ट्रैक्टर देने की बात कही और वह मंडी में चला गया। यहीं से ट्रैक्टर और ट्रालियां लेकर वापस घर की तरफ चल पड़ा।
टोल और फैक्टरी के सीसीटीवी पर नजर
पुलिस ने कर्मपाल की हत्या के मामले में गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। पुलिस वारदात का खुलासा करने को पानीपत-रोहतक हाईवे पर बने टोल प्लाजा और पलड़ी गांव में एक फैक्टरी के बाहर लगे सीसीटीवी की फुटेज देखने में लगी है। पुलिस का मानकर चल रही है कि कहीं आरोपियों ने पहले लिफ्ट तो नहीं ली हो।