पानीपत। माघ माह की शिवरात्रि के लिए विभिन्न मंदिरों में तैयारियां की जा रही हैं। इनमें इंसार चौक स्थित बावा लाल दयाल जी का मंदिर भी खास है। यहां रोजाना श्रद्धालुओं का तांता लगता है। बताते हैं कि बावा लाल दयाल के शिष्य विभाजन के दौरान पाकिस्तान से शिवलिंग और राम लला की मूर्ति लेकर पानीपत आए थे।
मंदिर के पुजारी के मुताबिक यहां पहले स्फटिक का शिवलिंग था लेकिन करीब 15 वर्ष पहले खंडित हो जाने पर दूसरे शिवलिंग की स्थापना की गई। बावा लाल दयाल जी महाराज का मंदिर अपनी भव्यता के लिए भी जाना जाता है। मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर में अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा भी स्थापित की गई हैं। हर रोज हजारों श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए मंदिर में आते हैं।
लोगों का कहना
बावा लाल दयाल जी का मंदिर अपने भव्यता के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। जो भी मंदिर में मुराद मांगता है, वह जरूरी पूरी होती है। - प्रदीप शर्मा
पाकिस्तान के हाजिराबाद से लाया गया शिवलिंग यहां स्थापित किया गया था। धीरे-धीरे यहां भक्तों की संख्या बढ़ती गई। - सुनील अरोड़ा, प्रधान, प्रधान
1355 में हुआ था बावा लाल दयाल का जन्म
देश-विदेश में असंख्य लोगों की आस्था का केंद्र सतगुरु बावा लाल दयाल का जन्म सन 1355 ई. के माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को लाहौर स्थित कस्बे कसूर में पटवारी भोलामल के घर में हुआ। उन्हें आध्यात्मिक गुण अपनी माता कृष्णा देवी से प्राप्त हुए। बचपन में ही इनके मुख पर अलौकिक तेज था, जिसे देखकर माता-पिता ने विद्वान ज्योतिषी को बुलवाया। उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह कोई सामान्य बालक नहीं बल्कि अध्यात्म के मार्ग पर चल कर स्वयं तो मोक्ष प्राप्त करेगा ही, आने वाली पीढ़ियों का भी मार्गदर्शन करेगा। बाद में ज्योतिषी की भविष्यवाणी सत्य साबित हुई।
- राजा बाबू शास्त्री, पुजारी
पानीपत। गद्दी मंदिर बावा लाल दयाल जी महाराज का द्श्य ।- फोटो : Panipat