पानीपत। चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि रविवार को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री व कंजक पूजन के साथ व्रत का अनुष्ठान पूर्ण कर भक्तों ने सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। श्रद्धालुओं ने घरों व मंदिरों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिरों व घरों में मां के जयकारे के गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर व्रत खोला। वहीं, धूमधाम से रामनवमी भी मनाई गई। इस दौरान मंदिरों में हवन यज्ञ किया गया और देश में खुशहाली व उन्नति की कामना की गई। जिन भक्तों ने अष्टमी के दिन कन्या पूजन नहीं किया था, उन्होंने नवमी के दिन नौ कन्याओं और एक बालक को घर पर आमंत्रित कर उनका पूजन कर उन्हें हलवा, पूरी व चने का भोग लगाया। मां सिद्धीदात्री की पूजा के साथ ही गणेश वंदना भी की।
अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे ने बताया कि चैत्र नवरात्र के नौवें दिन रविवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। साथ ही इसी दिन रामनवमी का भी त्योहार का शुभ संयोग होता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र के अंत में कंजक पूजन का महत्व है। इसके बिना नवरात्र व्रत अधूरा माना जाता है। इसलिए कंजक पूजन के लिए दस वर्ष तक की नौ कन्याओं की पूजा की जाती है। पूरी, हलवा, खीर और चने का प्रसाद तैयार कर सबसे पहले मां दुर्गा को भोग लगाकर कंजकों को खिलाया गया और पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया गया।
- श्रद्धालु ढूंढते रहे कंजक
कंजक पूजन के लिए लोग घर-घर बेटियों की तलाश में जुटे रहे। लोगों में बेटियों को दूसरे के घर भेजने में असमंजस की स्थिति बनी रही। जिस कारण भक्तों को कन्या पूजन के लिए नौ कन्याएं खोजने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। कई जगह तो एक-एक कंजक का 10-10 घर में पूजन किया गया। लोगों ने घरों से निकलकर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। वहीं, जरूरतमंद लोगोें को जरूरत के सामान दिए। गोशालाओं में गाय को चारा खिलाया और गोशालाओं को दान भी दिया।
- सजे प्रमुख मंदिर, भक्तों ने किए मां के दर्शन
नवरात्र को लेकर मंदिरों में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ लगी रही। अल सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया। शहर के ऐतिहासिक व प्रसिद्ध देवी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, अवध धाम मंदिर, श्री राधा-कृष्ण मंदिर, काशी गिरी मंदिर सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में माता के दरबार को फूल-माला और रंगीन लाइट से सजाया गया। मंदिरों में भक्तों ने मां के दर्शन किए। मंदिरों में मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से की। शाम को मंदिरों में भजन कीर्तन हुए। मां का दर्शन पाकर भक्त निहाल हो गए। मां के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे। तमाम मंदिरों में भंडारे भी लगाए गए।
- नवरात्र में कन्या पूजन से मिलता है यह वरदान
नवरात्र पर्व में मां की आराधना में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। युवा लड़कियों को मां का रूप माना जाता है, इसलिए इस दौरान लड़कियों की पूजा की जाती है और उन्हें देवी के समान सम्मान दिया जाता है। नवरात्र में साधक अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार नौ दिनों में कन्याओं की पूजा करते हैं, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इन दो दिनों में साधक अपनी नौ दिनों की साधना पूर्ण होने के बाद हवन करके कन्याओं को भोजन कराकर अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और उन्नति की कामना करता है।
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