पानीपत। उद्यमियों को शोधित ट्रीटेड (शोधित) पानी की बड़ी सौगात मिली है। सेक्टर-29 पार्ट-2 के 350 उद्योगों को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का शोधित पानी मिलने के प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लग गई है। जन स्वास्थ्य विभाग के एसीएस ने प्रोजेक्ट को पास कर इस दिशा में काम करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रशासन सेक्टर-29 पार्ट-2 से सिवाह गांव स्थित दोनों सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक 30 करोड़ रुपये में पाइप लाइन बिछाएगा। दोनों एसटीपी से ट्रीट होने वाला तीन करोड़ लीटर पानी अब ड्रेन में जाने के बजाए इस्तेमाल के लिए उद्यमियों को मिलेगा। ऐसे में भूजल का दोहन नहीं होगा। चंडीगढ़ स्थित जन स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय में मंगलवार को इस संबंध में हुई बैठक में विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ ही उद्यमी भी मौजूद रहे।
करोड़ों रुपये खर्च कर नालों का पानी होता है ट्रीट, फिर नालों में ही जाता है
पानीपत में गांव जाटल एवं सिवाह में चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं। इन प्लांट में हर रोज छह करोड़ लीटर पानी ट्रीट होता है। इस काम में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसके बाद इस शोधित पानी को दोबारा ड्रेन में छोड़ दिया जाता है। ऐसे में ये पानी उपयोग में नहीं आ पाता। अब गांव सिवाह स्थित एसटीपी में पानी को ट्रीट कर सेक्टर-29 पार्ट-2 में आपूर्ति किया जाएगा।
हर रोज बचेगा दो करोड़ लीटर पानी का दोहन
पानीपत में हर रोज आठ करोड़ लीटर पानी का दोहन होता है। सबसे अधिक पानी का इस्तेमाल डाइंग एवं प्रिटिंग उद्योगों में होता है। सेक्टर-29 पार्ट-2 में 350 उद्योग हैं। इनमें से आधे उद्योगों में नहर के पानी की सप्लाई होती है, बाकी भूमिगत पानी का दोहन करते हैं। यहां रोज लगभग दो करोड़ लीटर पानी का दोहन होता है। एसटीपी से पानी मिलने पर भूजल का दोहन काफी हद तक बचेगा।
डार्क जोन में पानीपत, इसलिए सरकार ने लगाई मुहर
पानीपत पिछले 13 साल से डार्क जोन में है। पिछले 10 साल में 15 फीट भूजल का स्तर गिर चुका है। रोज आठ करोड़ लीटर पानी का दोहन हो रहा है। पानी को बचाने के लिए सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर मुहर लगाई है। इससे उद्यमियों में खुशी है।
उद्योगों का चाहिए 30 एमएलडी पानी
गांव सिवाह में 35-35 एमएलडी के दो एसटीपी लगाए गए हैं। साफ होने वाला पानी गंदे नाले में डाला जाता है, जो यमुना में मिल जाता है। रंगाई उद्योगों को प्रतिदिन 30 एमएलडी पानी की जरूरत है। एसटीपी से निकलने वाला पानी उद्योगों के उपयोग में आ सकता है। इससे उद्योगों को सस्ता पानी मिलेगा।
सीएम ने डेढ़ साल पहले किया था निरीक्षण
सीएम मनोहर लाल ने उद्यमियों की मांग पर डेढ़ साल पहले सिवाह गांव स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया था। उनके साथ इस दौरान विधायक महिपाल ढांडा, विधायक प्रमोद विज व तत्कालीन डीसी सुमेधा कटारिया भी थीं। सीएम ने निरीक्षण कर फाइल चंडीगढ़ भेजने के निर्देश दिए थे।
बैठक बेहद अच्छी रही, बड़ी सौगात मिली है
बैठक बेहद अच्छी रही। शहर के 350 उद्यमियों को एसटीपी के पानी की बड़ी सौगात मिली है। उद्यमियों ने इसके लिए काफी संघर्ष किया है। एसटीपी का पानी मिलने से करोड़ों लीटर भूजल की बचत होगी। एसीएस ने प्रोजेक्ट पर अंतिम मोहर लगाकर स्थानीय अधिकारियों को काम करने के निर्देश दे दिए हैं। - भीम राणा, प्रधान, डायर्स एसोसिएशन
पानीपत डार्क जोन में, इसलिए यह जरूरी था
पानीपत कई सालों से डार्क जोन में है। करोड़ों लीटर हर रोज पानी का दोहन होता है। करोड़ों रुपये खर्च कर पानी को ट्रीट कर दोबारा नालों में छोड़ा जा रहा था। अब उद्यमियों को वह पानी मिलेगा। ये उद्यमियों को बड़ी सौगात मिली है। - प्रीतम सचदेवा, उद्यमी
लंबे समय से उद्योगपतियों की यह मांग चली आ रही थी। एसीएस ने इस संबंध में बैठक बुलाई थी, जिसमें उद्योगपति भी शामिल हुए थे। उद्योगों को लाभ होने के साथ ही जल संरक्षण की दिशा में भी यह अहम कदम है। जल्द ही इस दिशा में आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- संजय शर्मा, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग, पानीपत