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डाहर-नौल्था के ऐतिहासिक फाग में दूसरे प्रदेशों से भी पहुंचे लोग

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इसराना। नौल्था में फाग महोसत्व पर रंगों की डाट का नजारा। - फोटो : Panipat
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इसराना। नौल्था-डाहर में नौ शताब्दी से चली आ रही ऐतिहासिक फाग महोत्सव की शुक्रवार को धूम रही। रंगों की डाट लगाकर ग्रामीणों ने परंपरा का पालन किया। युवाओं का जोश देखने काबिल था। इस ऐतिहासिक फाग उत्सव को देखने के लिए दूसरे प्रदेशों से भी तमाम लोग पहुंचे। इस मौके पर गांव नौल्था में बाबा लाठे वाले व देवी-देवताओं झांकी के साथ शहीद महापुरुषों की झांकी भी निकाली गई।
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गौरतलब है कि माना जाता है कि ब्रज की होली, कुल्लू का दशहरा और नौल्था का फाग जिसने नहीं देखा उसने जिंदगी में कुछ नहीं देखा। ऐसे में इस महोत्सव का महत्व समझा जा सकता है। बताया जाता है कि फाग से दो सप्ताह पूर्व गांव की चौपाल की दीवार के साथ दोनों तरफ ग्रामीण दोनों हाथ ऊपर उठाकर खड़े होकर जोर अजमाइश करते हैं। इसे सुखी डाट कहा जाता है। यहां की परंपरा को निभाते हुए युवा फाग उत्सव पर रंगो की डाट में शामिल हुए व एक दूसरे को रंग लगाकर उत्सव मनाया। गांव नौल्था में बाबा लाठे वाले व देवी-देवताओं झांकी के साथ शहीद महापुरुषों की झांकी भी निकाली गई।
नौल्था में शुक्रवार को फाग उत्सव की शुरुआत बाबा लाठे वाली गोशाला से झांकियों की शोभायात्रा निकाल कर की गई। शोभायात्रा के आगे ग्रामीण बैंड बाजे के साथ नाच रहे थे। महिलाएं धार्मिक गीत गा रही थीं। रंगों की डाट लगाकर वर्षों से चली आ रही परंपरा निभाई गई। गांवों की सभी बिरादरियों के लोग भेदभाव भुलाकर चौपालों के नीचे गली में जमा हो गए व ऊपर से सभी पर रंग डालकर रंगों की डाट की परंपरा निभाई गई।
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क्षेत्र के सभी गांवों में फाग के मौके पर आपसी भेदभाव मिटा कर एक दूसरे को रंगों से सरोबार किया। नौल्था में फाग महोत्सव व झांकी देखने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य अभिमन्यु कोहाड़, भाकियू युवा प्रदेश अध्यक्ष रवि आजाद व लीगल एडवाइजर अमित सांगवान भी पहुंचे। भाभियों ने अपने देवरों जम कर कोरड़े लगाए। इसराना, पूठर बांध, परढ़ाना, बुआना लाखु, शाहपुर, जौंधन कलां, ब्राहमण माजरा समेत क्षेत्र के गांवों में लोगों ने एक दूसरे पर रंग डाल फाग उत्सव मनाया।

इसराना। नौल्था में निकाली गई शहीदों की झांकी।- फोटो : Panipat

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